रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के अध्यक्ष समीर वी कामत ने कहा कि अंतरिक्ष अब राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सहायक उपकरण मात्र नहीं रह गया है बल्कि यह भविष्य के संघर्षों का निर्णायक क्षेत्र बन चुका है। उन्होंने पूरे राष्ट्र के समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया ताकि भारत प्रतिद्वंद्वियों के साथ क्षमता अंतर को पाट सके जिनके अंतरिक्ष कार्यक्रम तेजी से विस्तार कर रहे हैं। मानेकशॉ सेंटर में आयोजित चौथे भारतीय डिफस्पेस सम्पोसियम में बोलते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतरिक्ष में प्रभुत्व प्राप्त करना युद्ध परिणाम निर्धारित करेगा। पहले युद्ध भूमि, वायु और समुद्र तक सीमित थे लेकिन अब साइबर, सूचना और अंतरिक्ष आयाम जुड़ गए हैं। जिन देशों के पास इन तीनों क्षेत्रों में श्रेष्ठता होगी वे भविष्य के युद्धों में बढ़त बनाए रखेंगे। कामत ने चेतावनी दी कि यह चुनौती डीआरडीओ अकेले नहीं स्वीकार सकता। सरकार, उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों का समन्वय आवश्यक है। उन्होंने महत्वपूर्ण अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भर क्षमताओं का निर्माण करने पर जोर दिया जो आयात पर निर्भर न रहें। संवेदनशील वातावरण में अंतरिक्ष संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी। नई अंतरिक्ष नीति और निजी क्षेत्र की भागीदारी से स्टार्टअप्स को अवसर मिले हैं। डीआरडीओ स्टार्टअप्स, एमएसएमई और शैक्षणिक संस्थानों के साथ सहयोग बढ़ा रहा है। अनुसंधान एवं विकास में निवेश में भारी वृद्धि जरूरी है। भारत को चीन और अन्य देशों के साथ प्रतिस्पर्धा करनी है जो अंतरिक्ष सैन्यीकरण में अग्रसर हैं। डिफेंस स्पेस एजेंसी और मिशन शक्ति जैसे कदम महत्वपूर्ण हैं। भविष्य के युद्धों में उपग्रह निगरानी, सुरक्षित संचार और मिसाइल रक्षा प्रणालियां निर्णायक होंगी। कामत ने निजी क्षेत्र से त्वरित क्षमता निर्माण की अपेक्षा व्यक्त की। यह दृष्टिकोण रक्षा क्षेत्र में नवाचार को गति प्रदान करेगा। भारत को 2047 तक विश्वस्तरीय सैन्य शक्ति बनना है। अंतरिक्ष रक्षा में आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करनी होगी। (शब्द संख्या: ३४१)
by Dainikshamtak on | 2026-04-24 15:13:44