आंध्र प्रदेश सरकार ने 300 मेगावाट से अधिक बिजली आवश्यकता वाली बड़ी निजी कंपनियों को स्वतंत्र बिजली वितरण लाइसेंस प्रदान करने की नीति लागू कर दी है। यह भारत का पहला राज्य है जो बिजली क्षेत्र के बाहर की निजी फर्मों को डिस्कॉम लाइसेंस जारी करने जा रहा है। आईटी, फार्मास्यूटिकल, स्टील और डेटा सेंटर कंपनियां इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगी। इन कंपनियों को अब बिजली उत्पादक इकाइयों से सीधे पावर परचेज एग्रीमेंट के माध्यम से बिजली खरीदने का अधिकार मिलेगा। इससे राज्य की सरकारी उपयोगिताओं पर निर्भरता कम होगी और बाधित बिना बिजली आपूर्ति सुनिश्चित होगी। आंध्र प्रदेश पूर्वी बिजली वितरण निगम के अध्यक्ष प्रध्वितेज इम्मादी ने बताया कि डेटा सेंटर, स्टील संयंत्र और अन्य विनिर्माण इकाइयों की विशिष्ट ऊर्जा आवश्यकताओं को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। अदानी-गूगल, ब्रुकफील्ड-रिलायंस और मेटा-सिफी टेक्नोलॉजीज जैसे बड़े डेटा सेंटर साझेदार इस नीति से लाभान्वित होंगे। आंध्र प्रदेश विद्युत नियामक आयोग से लाइसेंस प्राप्त करने के बाद कंपनियां अपना आंतरिक वितरण नेटवर्क स्थापित और संचालित कर सकेंगी। बिजली अधिनियम 2003 के संशोधनों के तहत वितरण क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने का प्रयास है। राज्य सरकार ने न्यूनतम 300 मेगावाट कनेक्टेड लोड की शर्त रखी है। डेटा सेंटरों की वृद्धि के साथ ऊर्जा मांग तेजी से बढ़ रही है। यह नीति निवेश आकर्षित करेगी और आर्थिक विकास को गति प्रदान करेगी। मौजूदा डिस्कॉम्स के राजस्व पर प्रभाव पड़ सकता है लेकिन उपभोक्ताओं को सस्ती और विश्वसनीय बिजली मिलेगी। आंध्र प्रदेश स्वच्छ ऊर्जा नीति 2024 के अनुरूप यह कदम राज्य को वैश्विक निवेश गंतव्य बनाएगा। उद्योगपतियों ने इस सुधार का स्वागत किया है। केंद्र सरकार की आत्मनिर्भरता पहल से मेल खाता यह निर्णय ऊर्जा क्षेत्र में क्रांति लाएगा। राज्य में निवेशों की बाढ़ आ रही है। (शब्द संख्या: ३२८)
by Dainikshamtak on | 2026-04-24 15:09:40