कोटक महिंद्रा एसेट मैनेजमेंट कंपनी के प्रबंध निदेशक नीलेश शाह ने कहा कि भारतीय घरों में बेकार पड़े लगभग 700 अरब डॉलर मूल्य के सोने को देश के विकास का शक्तिशाली इंजन बनाया जा सकता है। उन्होंने घरेलू सोने के मुद्रीकरण के लिए मजबूत नीतिगत प्रोत्साहन की मांग की। एएनआई को दिए विशेष साक्षात्कार में शाह ने भारत की सोने को मूल्य संरक्षण के साधन के रूप में रखने की सांस्कृतिक परंपरा का उल्लेख किया जो अनजाने में औपचारिक अर्थव्यवस्था के बाहर विशाल पूंजी को बेकार रखती है। उन्होंने बताया कि भारत ने सामूहिक रूप से 700 अरब डॉलर बहुमूल्य धातु के आयात पर खर्च किए हैं। यह राशि प्राप्त विदेशी प्रत्यक्ष निवेश और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश दोनों से अधिक है। शाह ने स्पष्ट किया कि भारत प्रतिवर्ष लगभग 1000 टन सोना आयात करता है जिसमें से केवल 300 टन आभूषण के रूप में निर्यात होता है। शेष बड़ी मात्रा घरों में संचित हो जाती है। अनौपचारिक आयात भी इस भंडार को बढ़ाते हैं। पिछले 25 वर्षों में सोने के आयात पर सैकड़ों अरब डॉलर खर्च हुए हैं। अधिकांश सोना आभूषण या बचत के रूप में घरों में तिजोरियों में बंद पड़ा रहता है। यदि इस सोने का एक हिस्सा औपचारिक वित्तीय प्रणाली में लाया जाए तो आर्थिक विकास को उछाल मिलेगा। शाह ने इसे बर्फ के समान बताया। मुद्रीकरण से प्रतिभा पूंजी और अवसंरचना का त्रिवेणी संगम बनेगा। विकास स्वाभाविक रूप से प्राप्त हो जाएगा। सरकार ने पहले सोना मोनेटाइजेशन स्कीम 2015 और 2019 में गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम चलाई थी लेकिन अपेक्षित सफलता नहीं मिली। नीलेश शाह ने नई योजनाओं के साथ आक्रामक प्रचार की आवश्यकता बताई। वर्तमान में सोने का भाव ऐतिहासिक उच्च स्तर पर है। घरेलू सोना औद्योगिक उत्पादन इन्फ्रास्ट्रक्चर और अन्य क्षेत्रों में निवेश के रूप में उपयोगी सिद्ध हो सकता है। यह कदम भारत को पांच ट्रिलियन अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य में सहायक होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि कर प्रोत्साहन और जागरूकता अभियान से मुद्रीकरण संभव है। (शब्द संख्या: ३५८)
by Dainikshamtak on | 2026-04-24 15:10:14