राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग यानी एनएचआरसी ने देशभर में निजी स्कूलों द्वारा महंगी किताबें अनिवार्य किए जाने की शिकायतों पर बड़ा कदम उठाते हुए पैन-इंडिया ऑडिट के आदेश दिए हैं और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सीबीएसई तथा केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। आयोग ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 30 दिनों के भीतर स्कूलों की बुकलिस्ट का स्कूल-वार ऑडिट कर एक्शन टेकन रिपोर्ट यानी एटीआर जमा करने को कहा है। एनएचआरसी ने यह कार्रवाई उन शिकायतों के आधार पर की है जिनमें आरोप लगाया गया है कि कई निजी और सीबीएसई से संबद्ध स्कूल एनसीईआरटी और एससीईआरटी की सस्ती किताबों के बजाय निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें खरीदने के लिए अभिभावकों पर दबाव डाल रहे हैं। आयोग ने कहा कि यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं तो यह शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 29, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और राष्ट्रीय स्कूल बैग नीति 2020 का उल्लंघन हो सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार कई स्कूल अतिरिक्त वर्कबुक और संदर्भ पुस्तकों को भी अनिवार्य कर रहे हैं, जिससे न केवल अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है बल्कि बच्चों के स्कूल बैग का वजन भी बढ़ रहा है। एनएचआरसी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय से 15 दिनों के भीतर यह स्पष्ट करने को कहा है कि पाठ्यक्रम और किताबों के निर्धारण में एनसीईआरटी और एससीईआरटी की क्या भूमिका है और क्या परीक्षा बोर्डों को प्राथमिक स्तर पर किताबें तय करने का अधिकार है। आयोग ने यह भी पूछा है कि क्या राज्यों ने स्कूलों की निगरानी के लिए कोई दिशा-निर्देश जारी किए हैं। हाल के दिनों में कई राज्यों से शिकायतें सामने आई हैं कि अभिभावकों को विशेष दुकानों या विक्रेताओं से ही किताबें खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है। एनएचआरसी की यह कार्रवाई शिक्षा के बढ़ते व्यवसायीकरण और अभिभावकों पर बढ़ते आर्थिक दबाव के खिलाफ एक बड़ी पहल मानी जा रही है। इससे निजी स्कूलों की किताब नीति और शुल्क संरचना पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो सकती है।
by Dainikshamtak on | 2026-04-23 16:25:03