भारत ने म्यांमार से लगती 1,643 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा में से अब तक 401 किलोमीटर बाड़बंदी का काम ऐतिहासिक रूप से पूरा कर लिया है। इस महत्त्वाकांक्षी परियोजना का मुख्य उद्देश्य रोहिंग्या शरणार्थियों की अवैध घुसपैठ और मादक पदार्थों व हथियारों की तस्करी को सख्ती से रोकना है। म्यांमार सीमा पर मणिपुर का मोरेह शहर रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है, जहाँ 9.2 किलोमीटर बाड़बंदी का कार्य भी सफलतापूर्वक संपन्न हो चुका है।
भारत और म्यांमार की सीमा कई स्थानों पर दुर्गम पहाड़ियों, घने जंगलों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों से होकर गुजरती है, जिसके कारण लंबे समय से यह क्षेत्र घुसपैठियों और तस्करों के लिए आसान रास्ता बना हुआ था। लेकिन नई बाड़बंदी परियोजना ने सुरक्षा बलों को इस चुनौती से निपटने में बड़ी मदद दी है। इसके तहत न केवल पारंपरिक तार की बाड़ लगाई जा रही है, बल्कि अत्याधुनिक सर्विलांस सिस्टम, हाई-टेक कैमरे और ड्रोन तकनीक का भी सहारा लिया जा रहा है, जिससे सीमा पर चौबीसों घंटे निगरानी संभव हो सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-म्यांमार सीमा पर हो रही यह बाड़बंदी सिर्फ सुरक्षा दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से भी बेहद अहम है। सीमा पर स्थिरता बढ़ने से सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में आसानी होगी। साथ ही, पड़ोसी देशों से होने वाली अवैध गतिविधियों पर लगाम लगाकर भारत की आंतरिक सुरक्षा को और मजबूत किया जा सकेगा। सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में इस पूरी 1,643 किलोमीटर सीमा पर बाड़बंदी का काम पूरा कर लेना है, जिससे इस संवेदनशील क्षेत्र में स्थायी शांति और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
by Dainikshamtak on | 2025-07-08 13:32:37