अभिनेत्री तापसी पन्नू ने फिल्म उद्योग में उम्र आधारित भेदभाव (एजिज्म) को लेकर खुलकर अपनी राय रखी है। एक हालिया बातचीत में उन्होंने कहा कि कई बार अभिनेत्रियों को 30 वर्ष की उम्र पार करने के बाद रोमांटिक कॉमेडी फिल्मों के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता, जबकि पुरुष अभिनेताओं के साथ ऐसा रवैया देखने को नहीं मिलता। उन्होंने इस सोच पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या कोई यही बात शाहरुख खान जैसे बड़े अभिनेता के बारे में कहने की हिम्मत करेगा।
तापसी पन्नू लंबे समय से फिल्म उद्योग में लैंगिक असमानता, वेतन अंतर और महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर अपनी स्पष्ट राय रखने के लिए जानी जाती हैं। इस बार उन्होंने उम्र को लेकर मौजूद दोहरे मानकों पर चर्चा की। उनके अनुसार, कई अभिनेत्रियों को यह महसूस कराया जाता है कि एक निश्चित उम्र के बाद वे रोमांटिक भूमिकाओं के लिए उपयुक्त नहीं रह जातीं, जबकि पुरुष कलाकारों को लंबे समय तक मुख्य भूमिकाओं में स्वीकार किया जाता है।
तापसी ने कहा कि उन्हें भी ऐसे अनुभवों का सामना करना पड़ा है, जहां यह संकेत दिया गया कि 30 वर्ष की आयु के बाद रोमांटिक कॉमेडी जैसी फिल्मों के लिए उनकी उम्र अधिक मानी जा रही है। उन्होंने इस सोच को चुनौती देते हुए कहा कि यही मानदंड पुरुष सितारों पर लागू नहीं किए जाते। उनके अनुसार, उद्योग में महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग अपेक्षाएं रखना एक व्यापक समस्या का हिस्सा है।
फिल्म उद्योग में एजिज्म लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। कई अभिनेत्रियों ने अतीत में भी कहा है कि उम्र बढ़ने के साथ उन्हें भूमिकाओं के सीमित विकल्प मिलते हैं, जबकि पुरुष कलाकार अपेक्षाकृत अधिक समय तक रोमांटिक और मुख्य किरदार निभाते रहते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रवृत्ति केवल भारतीय सिनेमा तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया के कई फिल्म उद्योगों में देखी जाती रही है।
तापसी ने यह भी संकेत दिया कि ऐसी मानसिकता केवल हिंदी फिल्म उद्योग तक सीमित नहीं है और दक्षिण भारतीय सिनेमा में भी इसी प्रकार के दृष्टिकोण देखने को मिल सकते हैं। उनका कहना था कि महिलाओं के लिए उम्र, शारीरिक छवि और सौंदर्य से जुड़े मानदंड अक्सर अधिक कठोर होते हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि हाल के वर्षों में कंटेंट-आधारित फिल्मों और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के विस्तार ने अभिनेत्रियों के लिए विविध भूमिकाओं के अवसर बढ़ाए हैं। इसके बावजूद, मुख्यधारा की व्यावसायिक फिल्मों में उम्र और लिंग से जुड़े पूर्वाग्रहों पर बहस जारी है। तापसी की टिप्पणी ने एक बार फिर इस विषय को सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
तापसी पन्नू का यह बयान ऐसे समय में आया है जब फिल्म उद्योग में प्रतिनिधित्व, समान अवसर और महिलाओं की भूमिका को लेकर व्यापक बहस चल रही है। उनकी टिप्पणी को कई लोग उद्योग में मौजूद दोहरे मानदंडों पर सवाल उठाने वाले हस्तक्षेप के रूप में देख रहे हैं।
फिलहाल, अभिनेत्री की यह टिप्पणी सोशल मीडिया और मनोरंजन जगत में चर्चा का विषय बनी हुई है तथा फिल्म उद्योग में उम्र और अवसरों के बीच संबंध को लेकर नए सिरे से बहस को बढ़ावा दे रही है।
by Dainikshamtak on | 2026-06-08 02:25:35