केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि वैश्विक स्तर पर ईंधन कीमतों में हुई बढ़ोतरी की तुलना में भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि अपेक्षाकृत बहुत कम रही है। उन्होंने दावा किया कि ईंधन मूल्य वृद्धि के मामले में भारत दुनिया में जापान के बाद दूसरे स्थान पर है, जहां कीमतों में सबसे कम बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब वैश्विक ऊर्जा बाजार भू-राजनीतिक तनावों और आपूर्ति संबंधी चुनौतियों से प्रभावित रहे हैं।
हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता के बावजूद भारत ने उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ को सीमित रखने का प्रयास किया है। उनके अनुसार, कई देशों में ईंधन कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई, जबकि भारत में बढ़ोतरी अपेक्षाकृत नियंत्रित रही। उन्होंने इस स्थिति को ऊर्जा प्रबंधन और आपूर्ति विविधीकरण की रणनीतियों से जोड़ा।
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक और उपभोक्ता देश है। देश अपनी कच्चे तेल की आवश्यकताओं का अधिकांश हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में होने वाले बदलावों का सीधा प्रभाव भारतीय ऊर्जा क्षेत्र पर पड़ता है। इसके बावजूद सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने कई अवसरों पर घरेलू कीमतों को स्थिर रखने का प्रयास किया है।
हाल के महीनों में पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताओं के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा गया। हालांकि, सरकार का कहना है कि भारत के पास पर्याप्त ईंधन भंडार उपलब्ध हैं और आपूर्ति को लेकर तत्काल कोई चिंता नहीं है। मंत्री ने यह भी कहा कि देश ने अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाकर आपूर्ति सुरक्षा को मजबूत किया है।
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, किसी देश में ईंधन कीमतों का निर्धारण केवल कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर निर्भर नहीं करता। इसमें कर संरचना, विनिमय दर, परिवहन लागत, विपणन मार्जिन और सरकारी नीतियों जैसे कई कारक भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए विभिन्न देशों के बीच ईंधन मूल्य वृद्धि की तुलना करते समय इन पहलुओं को भी ध्यान में रखा जाता है।
भारत सरकार हाल के वर्षों में वैकल्पिक ईंधनों को बढ़ावा देने पर भी जोर दे रही है। एथेनॉल मिश्रित ईंधन, फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों और ऊर्जा विविधीकरण की पहलों को आयातित जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने के प्रयासों का हिस्सा माना जा रहा है। सरकार का तर्क है कि इससे दीर्घकाल में ऊर्जा सुरक्षा और मूल्य स्थिरता को मजबूती मिल सकती है।
विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक ऊर्जा बाजारों में जारी अनिश्चितताओं के बीच ईंधन मूल्य नीति आर्थिक और राजनीतिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण बनी हुई है। ऐसे में भारत द्वारा कीमतों को अपेक्षाकृत नियंत्रित रखने के दावों और ऊर्जा सुरक्षा संबंधी उपायों पर आगे भी ध्यान बना रहने की संभावना है।
हरदीप सिंह पुरी का यह बयान भारत की ऊर्जा नीति, ईंधन मूल्य प्रबंधन और वैश्विक बाजारों में देश की स्थिति को लेकर चल रही चर्चा के बीच सामने आया है। आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों की दिशा और घरेलू नीतिगत निर्णय इस विषय को और महत्वपूर्ण बना सकते हैं।
by Dainikshamtak on | 2026-06-08 16:52:08