विश्व बैंक ने भारत के रूफटॉप सोलर ऊर्जा कार्यक्रमों को बढ़ावा देने के लिए 89 करोड़ अमेरिकी डॉलर की वित्तीय सहायता को मंजूरी दी है। इस निवेश का उद्देश्य देश में स्वच्छ ऊर्जा क्षमता का विस्तार करना, घरों और संस्थानों में सौर ऊर्जा के उपयोग को प्रोत्साहित करना तथा ऊर्जा क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा करना है। अनुमान है कि इस पहल से नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में लगभग 17 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार अवसर सृजित हो सकते हैं। भारत ने हाल के वर्षों में सौर ऊर्जा उत्पादन और हरित ऊर्जा अवसंरचना के विकास को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाया है। केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से आवासीय और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को रूफटॉप सोलर सिस्टम अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि विश्व बैंक की यह वित्तीय सहायता सौर ऊर्जा परियोजनाओं के विस्तार, निजी निवेश को आकर्षित करने और ऊर्जा क्षेत्र में तकनीकी नवाचार को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। रूफटॉप सोलर परियोजनाओं से उपभोक्ताओं के बिजली खर्च में कमी आने के साथ-साथ पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता भी घट सकती है। इसके अलावा कार्बन उत्सर्जन में कमी और पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा मिलने की संभावना है। भारत ने वर्ष 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन का लक्ष्य निर्धारित किया है और नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में लगातार वृद्धि इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। विश्लेषकों के अनुसार सौर ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ते निवेश से विनिर्माण, स्थापना, रखरखाव, इंजीनियरिंग और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर विकसित होंगे। इससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिल सकता है। सरकार का लक्ष्य ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ाने और भारत को वैश्विक हरित ऊर्जा नेतृत्व की दिशा में आगे ले जाने का है। विश्व बैंक की यह मंजूरी भारत के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय विश्वास और दीर्घकालिक विकास संभावनाओं को भी दर्शाती है।
by Dainikshamtak on | 2026-07-12 18:20:51