भारत वैश्विक सेवा और प्रौद्योगिकी क्षेत्र का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। हालिया उद्योग आकलनों के अनुसार दुनिया के लगभग 50 प्रतिशत ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) अब भारत में संचालित हो रहे हैं और देश की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में इनका लगभग 2 प्रतिशत योगदान है। ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर वे इकाइयां होती हैं, जिन्हें बहुराष्ट्रीय कंपनियां अनुसंधान एवं विकास, सूचना प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा विश्लेषण, साइबर सुरक्षा, वित्तीय सेवाएं, इंजीनियरिंग डिजाइन और वैश्विक व्यावसायिक संचालन जैसे कार्यों के लिए स्थापित करती हैं। भारत में बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे, चेन्नई, गुरुग्राम, नोएडा और मुंबई जैसे शहर इन केंद्रों के प्रमुख हब बन चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च कौशल वाले मानव संसाधन, प्रतिस्पर्धी परिचालन लागत, मजबूत डिजिटल अवसंरचना और अनुकूल कारोबारी माहौल ने भारत को जीसीसी निवेश के लिए सबसे पसंदीदा देशों में शामिल कर दिया है। इन केंद्रों के माध्यम से लाखों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिल रहा है तथा उच्च मूल्य वाली तकनीकी सेवाओं के निर्यात को भी बढ़ावा मिल रहा है। केंद्र और राज्य सरकारें भी निवेश आकर्षित करने, कौशल विकास को बढ़ावा देने और वैश्विक कंपनियों के लिए अनुकूल नीतियां लागू करने पर लगातार कार्य कर रही हैं। उद्योग विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले वर्षों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर, क्लाउड कंप्यूटिंग, डिजिटल इंजीनियरिंग और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में नए ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर स्थापित होने से भारत की वैश्विक भूमिका और मजबूत होगी। इससे न केवल रोजगार और विदेशी निवेश में वृद्धि होगी, बल्कि भारत के डिजिटल और नवाचार आधारित आर्थिक विकास को भी नई गति मिलेगी। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि यदि वर्तमान निवेश और नीति समर्थन जारी रहता है, तो भारत आने वाले वर्षों में वैश्विक नवाचार और कॉर्पोरेट संचालन का सबसे बड़ा केंद्र बनने की दिशा में और तेजी से आगे बढ़ सकता है।
by Dainikshamtak on | 2026-07-11 15:33:33