भारत एक तरफ राफेल, तेजस Mk1A और भविष्य के AMCA जैसे आधुनिक लड़ाकू विमानों पर निवेश कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ उसने ब्रिटेन से रिटायर हो चुके नौ पुराने Jaguar लड़ाकू विमान भी खरीदे हैं। पहली नज़र में यह फैसला विरोधाभासी लग सकता है। आखिर जब विमान उड़ाने लायक नहीं हैं, तो उन्हें खरीदने की ज़रूरत क्यों पड़ी?
असल वजह इन विमानों को उड़ाना नहीं, बल्कि भारतीय वायुसेना के मौजूदा Jaguar बेड़े को लंबे समय तक ऑपरेशनल बनाए रखना है।
भारतीय वायुसेना ने हाल ही में यूनाइटेड किंगडम से नौ रिटायर SEPECAT Jaguar एयरफ्रेम और बड़ी मात्रा में स्पेयर पार्ट्स हासिल किए हैं। ये विमान सीधे सेवा में शामिल नहीं होंगे। इन्हें Hindustan Aeronautics Limited (HAL) द्वारा खोलकर इनके उपयोगी हिस्से—जैसे इंजन के कंपोनेंट्स, लैंडिंग गियर, हाइड्रोलिक सिस्टम, एवियोनिक्स और अन्य महत्वपूर्ण उपकरण—निकाले जाएंगे। इन्हीं पार्ट्स का इस्तेमाल भारतीय Jaguar विमानों की मरम्मत और रखरखाव में किया जाएगा।
इस कदम की सबसे बड़ी वजह यह है कि आज भारत दुनिया का आखिरी देश है जो Jaguar लड़ाकू विमान ऑपरेट कर रहा है। ब्रिटेन, फ्रांस, ओमान और अन्य सभी देशों ने वर्षों पहले अपने Jaguar बेड़े को रिटायर कर दिया था। ऐसे में इनके ओरिजिनल स्पेयर पार्ट्स का उत्पादन लगभग बंद हो चुका है। नई सप्लाई मिलना बेहद मुश्किल और महंगा हो गया है। इसलिए रिटायर विमानों से पार्ट्स निकालना फिलहाल सबसे व्यावहारिक समाधान माना जा रहा है।
Jaguar भारतीय वायुसेना का सबसे नया लड़ाकू विमान नहीं है, लेकिन इसकी भूमिका आज भी महत्वपूर्ण है। DARIN-III अपग्रेड के बाद ये विमान कम ऊँचाई पर तेज़ गति से गहराई तक हमला करने वाले मिशनों के लिए उपयुक्त माने जाते हैं। समुद्री स्ट्राइक और रणनीतिक अभियानों में भी इनकी उपयोगिता बनी हुई है। जब तक इनकी जगह पर्याप्त संख्या में नए विमान नहीं आ जाते, तब तक इन्हें ऑपरेशनल रखना राष्ट्रीय सुरक्षा की आवश्यकता है।
यह फैसला भारतीय वायुसेना की मौजूदा चुनौतियों को भी दिखाता है। वायुसेना की स्वीकृत क्षमता 42 फाइटर स्क्वाड्रन की है, लेकिन वर्तमान में उसके पास लगभग 29 स्क्वाड्रन ही सक्रिय हैं। दूसरी ओर, तेजस Mk1A, तेजस Mk2 और AMCA जैसे स्वदेशी कार्यक्रमों को बड़े पैमाने पर सेवा में आने में अभी समय लगेगा। ऐसे में पुराने लेकिन सक्षम प्लेटफॉर्म्स को उड़ान योग्य बनाए रखना एक रणनीतिक आवश्यकता बन जाता है।
यह पहली बार नहीं है जब भारत ने ऐसा कदम उठाया हो। इससे पहले भी भारत फ्रांस, ब्रिटेन और ओमान से रिटायर Jaguar विमान और उनके स्पेयर पार्ट्स हासिल कर चुका है। यह दिखाता है कि रक्षा क्षेत्र में कई बार नई खरीद से ज़्यादा महत्वपूर्ण मौजूदा संसाधनों का प्रभावी उपयोग होता है।
रक्षा रणनीति केवल नए हथियार खरीदने तक सीमित नहीं होती। कई बार पुराने प्लेटफॉर्म्स को सही समय तक ऑपरेशनल बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। ब्रिटेन से खरीदे गए ये रिटायर Jaguar विमान उसी रणनीति का हिस्सा हैं। जब तक अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमान पूरी संख्या में भारतीय वायुसेना का हिस्सा नहीं बन जाते, तब तक ये पुराने विमान भारतीय आकाश की सुरक्षा में एक अहम भूमिका निभाते रहेंगे।
by Dainikshamtak on | 2026-07-11 15:48:17