केंद्र सरकार ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज होने वाली फिल्मों के लिए सेंसर प्रमाणन को अनिवार्य बनाने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस विषय पर संबंधित मंत्रालयों और हितधारकों के बीच चर्चा जारी है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो ओटीटी प्लेटफॉर्म पर प्रदर्शित होने वाली फिल्मों को सिनेमाघरों में प्रदर्शित फिल्मों की तरह केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) से प्रमाणन प्राप्त करना पड़ सकता है। वर्तमान में सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली फिल्मों के लिए सीबीएफसी का प्रमाणन अनिवार्य है, जबकि ओटीटी प्लेटफॉर्म सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशा-निर्देश एवं डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियमों, 2021 के तहत स्व-नियमन व्यवस्था का पालन करते हैं। सरकार का मानना है कि डिजिटल माध्यम पर बढ़ती दर्शक संख्या और विविध प्रकार की सामग्री को देखते हुए नियामक व्यवस्था की समीक्षा आवश्यक हो सकती है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य सामग्री के वर्गीकरण, आयु-आधारित उपयुक्तता और दर्शकों के हितों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करना बताया जा रहा है। हालांकि इस विषय पर अभी तक कोई अंतिम निर्णय या आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है। फिल्म उद्योग, ओटीटी प्लेटफॉर्म और डिजिटल सामग्री निर्माताओं की ओर से भी इस संभावित बदलाव पर विभिन्न सुझाव और प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सेंसर प्रमाणन अनिवार्य किया जाता है, तो इससे ओटीटी उद्योग की कार्यप्रणाली, कंटेंट रिलीज प्रक्रिया और नियामक ढांचे में महत्वपूर्ण बदलाव आ सकते हैं। वहीं कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि संतुलित नियमन और रचनात्मक स्वतंत्रता के बीच उचित समन्वय बनाए रखना भी आवश्यक होगा। सरकार की ओर से इस विषय पर अंतिम निर्णय व्यापक विचार-विमर्श और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लिया जाएगा। फिलहाल यह प्रस्ताव विचाराधीन है और इससे संबंधित किसी भी बदलाव की पुष्टि आधिकारिक अधिसूचना जारी होने के बाद ही मानी जाएगी।
by Dainikshamtak on | 2026-07-11 15:31:58