प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारत स्वदेशी ‘मेड इन इंडिया’ 6जी प्रौद्योगिकी के विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और देश का लक्ष्य अगली पीढ़ी की दूरसंचार तकनीक में वैश्विक नेतृत्व स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत ने डिजिटल अवसंरचना, दूरसंचार नेटवर्क और नवाचार के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है तथा अब 6जी तकनीक के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री के अनुसार देश में अनुसंधान संस्थान, स्टार्टअप, उद्योग और शैक्षणिक संस्थान मिलकर स्वदेशी 6जी समाधान विकसित करने के लिए कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल नई तकनीक का उपयोग करना नहीं, बल्कि उसके विकास और वैश्विक मानकों के निर्माण में भी भारत की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है। भारत ने पहले ही 6जी विजन दस्तावेज जारी कर भविष्य की दूरसंचार आवश्यकताओं के अनुरूप अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने की रणनीति अपनाई है। विशेषज्ञों के अनुसार 6जी तकनीक से अत्यधिक तेज डेटा गति, बेहद कम विलंबता, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित नेटवर्क, उन्नत औद्योगिक स्वचालन, स्मार्ट शहरों, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, रक्षा और अंतरिक्ष संचार जैसे क्षेत्रों में व्यापक परिवर्तन आने की संभावना है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत का डिजिटल परिवर्तन आज विश्व के लिए एक उदाहरण बन चुका है और यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना तथा दूरसंचार क्षेत्र में हुए सुधारों ने देश की तकनीकी क्षमता को नई पहचान दी है। सरकार का मानना है कि स्वदेशी 6जी तकनीक के विकास से देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता मजबूत होगी, उच्च कौशल वाले रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और वैश्विक दूरसंचार बाजार में भारतीय कंपनियों की भागीदारी भी विस्तारित होगी। आने वाले वर्षों में अनुसंधान, मानकीकरण और उद्योग सहयोग के माध्यम से भारत 6जी पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने की दिशा में कार्य जारी रखेगा। यह पहल ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘डिजिटल इंडिया’ के दीर्घकालिक लक्ष्यों को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
by Dainikshamtak on | 2026-07-10 16:18:12