कर्नाटक सरकार के ‘सेफ फुटपाथ’ अभियान को लेकर उठ रहे सवालों के बीच राज्य के मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा ने इस पहल का बचाव करते हुए कहा है कि इसका मुख्य उद्देश्य नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि फुटपाथों का निर्माण और उनका संरक्षण केवल शहरी सौंदर्यीकरण का विषय नहीं है, बल्कि यह पैदल चलने वाले लोगों के सुरक्षित आवागमन से जुड़ा एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक हित का मुद्दा है। मंत्री के अनुसार शहरों में अतिक्रमण, अवैध पार्किंग, असंगठित निर्माण कार्य और फुटपाथों के अनुचित उपयोग के कारण पैदल यात्रियों को सड़क पर चलने के लिए मजबूर होना पड़ता है, जिससे दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ जाता है। ‘सेफ फुटपाथ’ अभियान के माध्यम से सरकार का लक्ष्य फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त करना, उनकी गुणवत्ता में सुधार करना तथा दिव्यांगजन, वरिष्ठ नागरिकों और बच्चों सहित सभी नागरिकों के लिए सुरक्षित और सुगम पैदल मार्ग उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच आधुनिक और समावेशी शहरी अवसंरचना विकसित करना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। मंत्री ने यह भी कहा कि अभियान के दौरान स्थानीय निकायों को निर्देश दिए गए हैं कि वे कानून के दायरे में रहते हुए कार्रवाई करें और नागरिकों के साथ समन्वय बनाए रखें। इस पहल का उद्देश्य किसी विशेष वर्ग को प्रभावित करना नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्थानों का नियमानुसार उपयोग सुनिश्चित करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षित फुटपाथ किसी भी आधुनिक शहर की आधारभूत आवश्यकता होते हैं और इससे सड़क दुर्घटनाओं में कमी, पैदल आवागमन को बढ़ावा तथा पर्यावरण अनुकूल परिवहन को प्रोत्साहन मिल सकता है। हालांकि अभियान को लेकर विभिन्न सामाजिक संगठनों और प्रभावित पक्षों की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। सरकार का कहना है कि नागरिक सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।
by Dainikshamtak on | 2026-07-10 16:17:36