भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष वी. नारायणन ने भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) के स्नातक छात्रों से देश और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को प्राथमिकता देने का आह्वान किया है। दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले युवाओं को केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि अपने ज्ञान, नवाचार और कौशल का उपयोग समाज और राष्ट्र के विकास के लिए भी करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत तेजी से विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष अनुसंधान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उन्नत विनिर्माण के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है तथा इस परिवर्तन में युवा वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसरो प्रमुख ने छात्रों से विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने में सक्रिय योगदान देने का आग्रह करते हुए कहा कि अनुसंधान, नवाचार और स्वदेशी तकनीकों का विकास देश की आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को मजबूत करेगा। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत के वैज्ञानिक और तकनीकी संस्थानों से निकलने वाले प्रतिभाशाली युवा विश्वस्तरीय समाधान विकसित करने की क्षमता रखते हैं और उन्हें अपनी प्रतिभा का उपयोग मानवता के व्यापक हित में करना चाहिए। वी. नारायणन ने इसरो की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ने अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में सीमित संसाधनों के बावजूद उल्लेखनीय सफलताएं हासिल की हैं और आने वाले वर्षों में गगनयान, चंद्र मिशन, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी तथा उपग्रह आधारित सेवाओं के क्षेत्र में और बड़े लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च शिक्षा संस्थानों और अनुसंधान संगठनों के बीच सहयोग से भारत नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकता है। उन्होंने छात्रों से ईमानदारी, अनुशासन और सामाजिक उत्तरदायित्व को अपने पेशेवर जीवन का आधार बनाने का भी आग्रह किया। उनके अनुसार विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब देश की नई पीढ़ी विज्ञान, तकनीक और नवाचार के माध्यम से समाज के लिए स्थायी और प्रभावी समाधान विकसित करेगी।
by Dainikshamtak on | 2026-07-12 18:15:54