अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े कथित दान विवाद को लेकर कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि मामले में लगाए गए आरोपों और सामने आए विभिन्न दावों की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कराई जानी चाहिए, ताकि सभी तथ्यों की स्पष्टता सामने आ सके और जनविश्वास बना रहे। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यदि किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या प्रक्रिया संबंधी त्रुटि के आरोप लगाए गए हैं, तो उनकी जांच सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में कराई जानी चाहिए। दूसरी ओर, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और संबंधित पक्षों ने समय-समय पर अपने ऊपर लगाए गए आरोपों का खंडन किया है और कहा है कि सभी वित्तीय लेनदेन निर्धारित नियमों एवं कानूनी प्रक्रियाओं के अनुरूप किए गए हैं। ट्रस्ट की ओर से पहले भी यह कहा गया है कि दान और अन्य वित्तीय गतिविधियों का लेखा-जोखा निर्धारित व्यवस्था के अनुसार रखा जाता है। फिलहाल इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय की ओर से कांग्रेस की मांग पर कोई आदेश जारी नहीं किया गया है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस संबंध में कोई याचिका सर्वोच्च न्यायालय में दायर की जाती है, तो उस पर न्यायालय कानून और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर निर्णय करेगा। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह मुद्दा राजनीतिक और कानूनी दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण है तथा आने वाले समय में इस पर विभिन्न पक्षों की प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं। इस बीच संबंधित एजेंसियों या न्यायालय की ओर से किसी भी प्रकार की आधिकारिक जांच या निष्कर्ष की घोषणा होने तक मामले को केवल आरोप और प्रत्यारोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। निष्पक्ष जांच और आधिकारिक निष्कर्ष आने के बाद ही किसी भी दावे की पुष्टि की जा सकती है। फिलहाल यह मामला सार्वजनिक और राजनीतिक चर्चा का विषय बना हुआ है तथा सभी पक्ष अपनी-अपनी दलीलें प्रस्तुत कर रहे हैं।
by Dainikshamtak on | 2026-07-12 18:19:17