भारतीय नौसेना की ₹1 लाख करोड़ की मेगा युद्धपोत योजना, अगली पीढ़ी के विध्वंसक और स्टेल्थ फ्रिगेट होंगे शामिल

भारतीय नौसेना की ₹1 लाख करोड़ की मेगा युद्धपोत योजना, अगली पीढ़ी के विध्वंसक और स्टेल्थ फ्रिगेट होंगे शामिल

भारतीय नौसेना समुद्री सुरक्षा और सामरिक क्षमता को नई ऊंचाई देने के लिए लगभग ₹1 लाख करोड़ की लागत वाली एक महत्वाकांक्षी युद्धपोत विस्तार योजना पर कार्य कर रही है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इस योजना के तहत अगली पीढ़ी के अत्याधुनिक विध्वंसक युद्धपोत, स्टेल्थ फ्रिगेट और अन्य उन्नत नौसैनिक प्लेटफॉर्म को शामिल करने की तैयारी की जा रही है। प्रस्तावित परियोजना का उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री उपस्थिति को और मजबूत करना, समुद्री सीमाओं की सुरक्षा बढ़ाना तथा भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने की क्षमता विकसित करना है। नई पीढ़ी के युद्धपोतों में आधुनिक रडार प्रणाली, लंबी दूरी की मिसाइलें, उन्नत वायु रक्षा प्रणाली, पनडुब्बी रोधी क्षमता, नेटवर्क आधारित युद्ध प्रणाली और कम रडार पहचान वाली स्टेल्थ तकनीक जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं शामिल किए जाने की संभावना है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन युद्धपोतों के शामिल होने से भारतीय नौसेना की परिचालन क्षमता, समुद्री प्रतिरोधक शक्ति और बहु-आयामी युद्ध संचालन की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इस योजना के तहत स्वदेशी जहाज निर्माण पर विशेष जोर दिए जाने की उम्मीद है, जिससे ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को भी बल मिलेगा। सार्वजनिक और निजी शिपयार्डों की भागीदारी से देश में रक्षा विनिर्माण, अनुसंधान एवं विकास तथा उच्च तकनीकी रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं। विश्लेषकों का कहना है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती सामरिक प्रतिस्पर्धा और समुद्री सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए भारतीय नौसेना का आधुनिकीकरण राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। हालांकि परियोजना के विभिन्न चरणों, बजटीय स्वीकृति, निर्माण समय-सीमा और अंतिम अनुबंधों से संबंधित औपचारिक घोषणाएं संबंधित सरकारी प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही सामने आएंगी। यदि यह योजना निर्धारित रूप से लागू होती है, तो यह भारतीय नौसेना के इतिहास की सबसे बड़ी आधुनिकीकरण परियोजनाओं में से एक साबित हो सकती है और भारत की समुद्री शक्ति को वैश्विक स्तर पर और अधिक मजबूत बनाएगी।

by Dainikshamtak on | 2026-07-12 18:15:02

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