मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है जिसने वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के प्रावधानों के तहत अपने राज्य वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन किया है। डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने 5 जुलाई 2026 को जारी राजपत्र (Gazette) अधिसूचना के माध्यम से नए बोर्ड का गठन किया। इस पुनर्गठित बोर्ड की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें पहली बार दो हिंदू (गैर-मुस्लिम) सदस्यों को भी शामिल किया गया है, जैसा कि संशोधित कानून में प्रावधान किया गया है। राज्य सरकार का कहना है कि यह कदम वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के प्रावधानों के अनुरूप उठाया गया है। सरकार के अनुसार नए ढांचे का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रशासनिक दक्षता को बढ़ाना है। विशेषज्ञों के अनुसार वक्फ बोर्ड मुस्लिम समुदाय की धार्मिक और परोपकारी संपत्तियों के प्रबंधन के लिए जिम्मेदार वैधानिक संस्था होती है। संशोधित कानून के तहत बोर्ड की संरचना और प्रशासन से जुड़े कई प्रावधानों में बदलाव किए गए हैं। मध्य प्रदेश इस कानून को लागू करने वाला पहला राज्य बनने के कारण राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस कदम पर विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं। समर्थकों का कहना है कि यह संशोधित कानून के अनुरूप प्रशासनिक सुधार का हिस्सा है, जबकि आलोचकों ने इसके कुछ प्रावधानों पर पहले भी अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के विभिन्न प्रावधानों का प्रभाव अलग-अलग राज्यों में उनके क्रियान्वयन के साथ स्पष्ट होगा। फिलहाल मध्य प्रदेश इस दिशा में पहल करने वाला पहला राज्य बन गया है। आने वाले समय में अन्य राज्यों द्वारा भी संशोधित कानून के अनुरूप अपने-अपने वक्फ बोर्डों के पुनर्गठन की संभावना जताई जा रही है।
by Dainikshamtak on | 2026-07-07 13:35:06