केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की है कि वर्ष 2026 के अंत तक भारत में पांच सेमीकंडक्टर प्लांट परिचालन (Operational) हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि भारत तेजी से वैश्विक सेमीकंडक्टर विनिर्माण केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है और सरकार इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश, तकनीकी सहयोग और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा दे रही है। सरकार का लक्ष्य देश में चिप निर्माण क्षमता विकसित करना, आयात पर निर्भरता कम करना और वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स आपूर्ति श्रृंखला में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाना है। पिछले कुछ वर्षों में भारत सरकार ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन, प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना और अन्य प्रोत्साहन कार्यक्रमों के माध्यम से इस क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने के लिए कई कदम उठाए हैं। विभिन्न राज्यों में स्थापित की जा रही परियोजनाओं में चिप फैब्रिकेशन, एटीएमपी (Assembly, Testing, Marking and Packaging) तथा सेमीकंडक्टर पैकेजिंग इकाइयाँ शामिल हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ये संयंत्र मोबाइल फोन, ऑटोमोबाइल, रक्षा, दूरसंचार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डेटा सेंटर और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होंगे। भारत वर्तमान में सेमीकंडक्टर चिप्स का बड़ा आयातक है, जबकि घरेलू मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में स्थानीय उत्पादन शुरू होने से आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी और दीर्घकाल में आयात पर निर्भरता कम करने में सहायता मिलेगी। आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि इन परियोजनाओं से हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे तथा उच्च तकनीक विनिर्माण और अनुसंधान को भी बढ़ावा मिलेगा। सरकार का उद्देश्य भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर विनिर्माण का प्रमुख केंद्र बनाना है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि निर्धारित समयसीमा के भीतर सभी परियोजनाएं शुरू हो जाती हैं, तो भारत वैश्विक चिप उद्योग में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकेगा। यह पहल 'मेक इन इंडिया', 'डिजिटल इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' अभियानों को भी नई गति देने वाली मानी जा रही है।
by Dainikshamtak on | 2026-07-06 13:50:27