डीपफेक और फर्जी कंटेंट पर सख्ती की तैयारी, भारत लाएगा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए अलग कानून

डीपफेक और फर्जी कंटेंट पर सख्ती की तैयारी, भारत लाएगा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए अलग कानून


भारत सरकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते उपयोग और उससे जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए एक अलग कानूनी ढांचा तैयार करने पर विचार कर रही है। सूचना प्रौद्योगिकी सचिव एस. कृष्णन ने कहा है कि सरकार डीपफेक, फर्जी कंटेंट, एआई-जनित गलत सूचना और उभरते डिजिटल जोखिमों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए विशेष कानून बनाने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि एआई तकनीक तेजी से विकसित हो रही है और इसके साथ-साथ इसके दुरुपयोग की संभावनाएं भी बढ़ी हैं। सरकार का उद्देश्य ऐसा नियामक ढांचा तैयार करना है जो नवाचार को बढ़ावा देने के साथ-साथ नागरिकों की सुरक्षा और डिजिटल विश्वास को भी सुनिश्चित करे। विशेषज्ञों के अनुसार डीपफेक तकनीक के माध्यम से किसी व्यक्ति की तस्वीर, वीडियो या आवाज़ का उपयोग कर भ्रामक सामग्री तैयार की जा सकती है, जिससे चुनाव, वित्तीय धोखाधड़ी, साइबर अपराध और सामाजिक विश्वास पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। हाल के वर्षों में दुनिया भर की सरकारें एआई के नियमन को लेकर नए कानून और दिशा-निर्देश तैयार कर रही हैं। भारत भी इस दिशा में संतुलित नीति अपनाने की कोशिश कर रहा है, ताकि एआई आधारित नवाचार प्रभावित न हो और साथ ही उसके दुरुपयोग पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रस्तावित कानून में एआई प्लेटफॉर्म की जवाबदेही, पारदर्शिता, डेटा सुरक्षा, डीपफेक की पहचान, उपयोगकर्ता संरक्षण और दंडात्मक प्रावधान जैसे विषय शामिल हो सकते हैं। हालांकि सरकार ने अभी तक प्रस्तावित कानून का अंतिम मसौदा या समयसीमा सार्वजनिक नहीं की है। भारत पहले ही डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन कानून और विभिन्न आईटी नियमों के माध्यम से डिजिटल क्षेत्र के नियमन की दिशा में कदम उठा चुका है। नया एआई कानून इन मौजूदा व्यवस्थाओं का पूरक हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह कानून प्रभावी रूप से लागू होता है, तो भारत जिम्मेदार और सुरक्षित एआई उपयोग के लिए वैश्विक मानक स्थापित करने वाले देशों में शामिल हो सकता है।

by Dainikshamtak on | 2026-07-04 19:41:00

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