वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप के बाद भारत ने एक बार फिर यह दिखाया कि उसकी वैश्विक भूमिका केवल राहत सामग्री भेजने तक सीमित नहीं है। *ऑपरेशन अमिस्ताद* के तहत भारत ने न सिर्फ डॉक्टरों, मेडिकल टीमों और आपातकालीन सहायता को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाया, बल्कि एक ऐसी स्वदेशी तकनीक भी तैनात की, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा। इस तकनीक का नाम है *BHISHM Cube—एक ऐसा पोर्टेबल मॉड्यूलर अस्पताल, जो महज **12 मिनट* में पूरी तरह से काम करने के लिए तैयार हो सकता है।ऑपरेशन अमिस्ताद की शुरुआत 26 जून 2026 को वेनेजुएला में आए दो शक्तिशाली भूकंपों के बाद की गई। भारतीय वायुसेना के *C-17 ग्लोबमास्टर* विमान राहत सामग्री, चिकित्सा उपकरण और भारतीय सेना के 60 पैरा फील्ड हॉस्पिटल की 41 सदस्यीय मेडिकल टीम को लेकर वेनेजुएला पहुंचे। इस टीम का उद्देश्य खोज एवं बचाव कार्यों के साथ-साथ प्रभावित लोगों को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना था।हालांकि इस पूरे मिशन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा था *BHISHM Cube*। पहली नजर में यह किसी सामान्य कंटेनर जैसा दिखाई देता है, लेकिन वास्तव में यह एक अत्याधुनिक, पोर्टेबल और मॉड्यूलर फील्ड हॉस्पिटल है। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि किसी भी आपदा क्षेत्र में पहुंचने के कुछ ही मिनटों के भीतर इसे पूरी तरह से सक्रिय किया जा सके।BHISHM Cube के भीतर वह लगभग हर सुविधा मौजूद होती है, जिसकी जरूरत किसी आधुनिक अस्पताल में होती है। इसमें *आईसीयू सपोर्ट, ऑपरेशन थिएटर, वेंटिलेटर, अल्ट्रासाउंड मशीन, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, मॉनिटरिंग सिस्टम और आपातकालीन सर्जरी के लिए आवश्यक उपकरण* शामिल होते हैं। यही कारण है कि यह किसी भी बड़े अस्पताल की तरह गंभीर रूप से घायल मरीजों का इलाज करने में सक्षम है, जबकि इसके लिए किसी स्थायी भवन या पहले से मौजूद मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता नहीं होती।इस प्रणाली की सबसे बड़ी खासियत इसकी क्षमता है। एक *BHISHM Cube* लगभग *200 मरीजों* के इलाज का समर्थन कर सकता है और प्रतिदिन *10 से 15 आपातकालीन सर्जरी* करने की क्षमता रखता है। प्राकृतिक आपदाओं, युद्ध क्षेत्रों या दूरदराज के इलाकों में जहां अस्पताल तक पहुंचना मुश्किल हो, वहां यह तकनीक जीवनरक्षक साबित हो सकती है।BHISHM Cube की एक और दिलचस्प विशेषता इसकी *RFID आधारित स्मार्ट इन्वेंट्री प्रणाली* है। इसके हर मेडिकल उपकरण और दवा पर RFID टैग लगाया गया है। यदि किसी डॉक्टर को किसी विशेष दवा या उपकरण की आवश्यकता हो, तो वह केवल टैबलेट में उसका नाम दर्ज करता है और सिस्टम तुरंत बता देता है कि वह किस मॉड्यूल में रखा गया है। इससे इलाज के दौरान समय की बचत होती है और आपातकालीन परिस्थितियों में मेडिकल टीम की कार्यक्षमता कई गुना बढ़ जाती है।यह प्रणाली पूरी तरह आत्मनिर्भर भी है। BHISHM Cube में *सोलर पावर सिस्टम, पोर्टेबल जनरेटर और ऑक्सीजन कंसंट्रेटर* जैसी सुविधाएं मौजूद हैं। इसका अर्थ है कि यदि किसी क्षेत्र में बिजली, पानी या अन्य बुनियादी सुविधाएं पूरी तरह नष्ट हो चुकी हों, तब भी यह अस्पताल बिना किसी बाहरी सहायता के लगातार काम कर सकता है।BHISHM Cube का विकास भारत के *प्रोजेक्ट आरोग्य मैत्री* के तहत किया गया है। इसका उद्देश्य केवल भारतीय सेना की जरूरतों को पूरा करना नहीं, बल्कि प्राकृतिक आपदाओं, मानवीय संकटों और अंतरराष्ट्रीय राहत अभियानों में तेज, प्रभावी और आधुनिक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना है। यही कारण है कि इसका उपयोग केवल सैन्य अभियानों तक सीमित नहीं है। इसे भारत के कई प्रमुख चिकित्सा संस्थानों, बड़े सार्वजनिक आयोजनों और आपदा प्रबंधन अभियानों में भी शामिल किया जा चुका है।ऑपरेशन अमिस्ताद इस बात का संकेत भी है कि भारत की विदेश नीति में *मानवीय सहायता और आपदा राहत (Humanitarian Assistance and Disaster Relief - HADR)* का महत्व लगातार बढ़ रहा है। पहले जहां भारत दुनिया भर में दवाइयों और वैक्सीन की आपूर्ति के लिए जाना जाता था, वहीं अब वह स्वदेशी चिकित्सा तकनीकों और आपदा प्रबंधन क्षमताओं को भी वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित कर रहा है।आज के समय में किसी देश की ताकत केवल उसकी सैन्य क्षमता से नहीं आंकी जाती, बल्कि इस बात से भी तय होती है कि वह संकट के समय दुनिया की कितनी तेजी और प्रभावी ढंग से मदद कर सकता है। वेनेजुएला में BHISHM Cube की तैनाती इसी बदलती सोच का उदाहरण है।भविष्य में यदि मानवीय कूटनीति और वैश्विक आपदा राहत अभियानों का महत्व और बढ़ता है, तो *BHISHM Cube* जैसी स्वदेशी तकनीकें भारत की *सॉफ्ट पावर*, तकनीकी नवाचार और वैश्विक नेतृत्व की पहचान बनने की पूरी क्षमता रखती हैं।
by Dainikshamtak on | 2026-07-03 15:03:14