भारत और जापान द्विपक्षीय व्यापार को अधिक सरल, तेज़ और किफायती बनाने के लिए सीधे येन-रुपया व्यापार निपटान (Direct Yen–Rupee Trade Settlement) व्यवस्था को आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं। इस प्रस्तावित ढांचे का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापारिक लेनदेन में अमेरिकी डॉलर जैसी तीसरी मुद्रा पर निर्भरता कम करना और स्थानीय मुद्राओं में भुगतान को प्रोत्साहित करना है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि यह व्यवस्था प्रभावी रूप से लागू होती है, तो भारतीय और जापानी कंपनियां आयात-निर्यात के भुगतान सीधे भारतीय रुपये और जापानी येन में कर सकेंगी। इससे विदेशी मुद्रा विनिमय की अतिरिक्त लागत कम हो सकती है, भुगतान प्रक्रिया अधिक सुगम बन सकती है और विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव से जुड़े जोखिम भी घट सकते हैं। भारत और जापान के बीच आर्थिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। जापान भारत के प्रमुख निवेशकों में शामिल है और बुनियादी ढांचा, मेट्रो रेल, हाई-स्पीड रेल, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर तथा विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच व्यापक सहयोग है। स्थानीय मुद्रा में व्यापार व्यवस्था से इन क्षेत्रों में व्यापार और निवेश को और गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। वैश्विक स्तर पर कई देश अंतरराष्ट्रीय व्यापार में स्थानीय मुद्राओं के उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रहे हैं ताकि वैश्विक वित्तीय जोखिमों को कम किया जा सके और भुगतान प्रणाली अधिक विविध एवं लचीली बन सके। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-जापान के बीच प्रस्तावित येन-रुपया निपटान ढांचा दोनों देशों की आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करेगा तथा एशिया में क्षेत्रीय वित्तीय सहयोग को भी नई दिशा दे सकता है। हालांकि इस व्यवस्था के पूर्ण क्रियान्वयन के लिए दोनों देशों के केंद्रीय बैंकों, वित्तीय संस्थानों और नियामक एजेंसियों के बीच आवश्यक प्रक्रियाओं और तंत्र को अंतिम रूप दिया जाना बाकी है। यदि यह पहल सफल रहती है, तो भविष्य में दोनों देशों के बीच व्यापारिक लेनदेन अधिक प्रभावी और प्रतिस्पर्धी बनने की संभावना है।
by Dainikshamtak on | 2026-07-01 15:40:13