केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि उत्तर प्रदेश का जेवर क्षेत्र तेजी से एक प्रमुख प्रौद्योगिकी और औद्योगिक केंद्र के रूप में उभर रहा है तथा आने वाले वर्षों में यह “उत्तर भारत का सिलिकॉन वैली” बन सकता है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में हजारों करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों और चल रही परियोजनाओं के कारण जेवर का आर्थिक और तकनीकी महत्व लगातार बढ़ रहा है। मंत्री के अनुसार नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर, लॉजिस्टिक्स, डिजिटल अवसंरचना और औद्योगिक विकास से जुड़ी परियोजनाएं इस परिवर्तन की प्रमुख आधारशिला बन रही हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार निवेश-अनुकूल वातावरण तैयार करने के लिए बुनियादी ढांचे, कनेक्टिविटी और नीति सुधारों पर लगातार काम कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जेवर क्षेत्र का रणनीतिक स्थान, दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से निकटता, एक्सप्रेसवे नेटवर्क और आगामी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा इसे बड़े निवेश के लिए आकर्षक गंतव्य बना रहे हैं। हाल के वर्षों में कई घरेलू और वैश्विक कंपनियों ने इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी, वेयरहाउसिंग, विनिर्माण और डेटा सेंटर क्षेत्र में निवेश की घोषणा की है। आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार यदि प्रस्तावित परियोजनाएं निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरी होती हैं, तो इससे बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे तथा क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। इसके साथ ही स्थानीय उद्योग, स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र और कौशल विकास को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है। सरकार का लक्ष्य भारत को वैश्विक विनिर्माण और प्रौद्योगिकी केंद्र के रूप में स्थापित करना है, जिसमें उत्तर प्रदेश की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि “सिलिकॉन वैली” जैसी उपमा क्षेत्र की संभावनाओं को दर्शाती है, जबकि इसका वास्तविक आकलन निवेश परियोजनाओं के क्रियान्वयन, उद्योगों की स्थापना और रोजगार सृजन के आधार पर किया जाएगा। फिलहाल जेवर में तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक और तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र को भारत के सबसे महत्वाकांक्षी विकास क्षेत्रों में से एक माना जा रहा है।
by Dainikshamtak on | 2026-06-30 16:31:01