भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने देश के निजी अंतरिक्ष उद्योग को बड़ा अवसर देते हुए रणनीतिक SAMOOHA (सामूहा) कार्यक्रम के तहत तीन इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस (ELINT) स्मॉल सैटेलाइट्स के पूर्ण निर्माण में भागीदारी के लिए आमंत्रित किया है। इस पहल के तहत चयनित भारतीय उद्योग साझेदारों को उपग्रहों की असेंबली (Assembly), इंटीग्रेशन (Integration) और परीक्षण (Testing) की पूरी जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। यह पहली बार है जब इसरो इस स्तर पर निजी उद्योग को एक रणनीतिक उपग्रह कार्यक्रम में व्यापक भूमिका देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस उपग्रहों का उपयोग दुश्मन के रडार, संचार संकेतों और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उत्सर्जनों की निगरानी एवं विश्लेषण के लिए किया जाता है। ऐसे उपग्रह राष्ट्रीय सुरक्षा, समुद्री निगरानी, सीमा सुरक्षा और रक्षा संबंधी सूचनाएं जुटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सामूहा कार्यक्रम भारत की अंतरिक्ष-आधारित निगरानी क्षमता को और मजबूत करेगा। इसरो पिछले कुछ वर्षों से निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दे रहा है। भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण (IN-SPACe) की स्थापना के बाद निजी कंपनियों को उपग्रह निर्माण, प्रक्षेपण सेवाओं, अंतरिक्ष तकनीक और संबंधित क्षेत्रों में अधिक अवसर मिल रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि निजी उद्योग को इस स्तर की जिम्मेदारी देने से अत्याधुनिक अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के विकास, उत्पादन क्षमता और आत्मनिर्भरता को नई गति मिलेगी। साथ ही इससे भारत का अंतरिक्ष उद्योग वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेगा। रक्षा और अंतरिक्ष विश्लेषकों के अनुसार सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के सहयोग से भविष्य में रणनीतिक अंतरिक्ष परियोजनाओं के विकास में तेजी आने की संभावना है। यह पहल ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के अनुरूप भी मानी जा रही है। यदि परियोजना सफलतापूर्वक आगे बढ़ती है, तो भारत की इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस क्षमता और निजी अंतरिक्ष उद्योग दोनों को महत्वपूर्ण लाभ मिल सकता है। आने वाले समय में इसरो द्वारा साझेदार कंपनियों के चयन और परियोजना के क्रियान्वयन से संबंधित अधिक जानकारी जारी की जा सकती है।
by Dainikshamtak on | 2026-07-01 15:42:49