भारत का 10 साल में 16 हजार जहाजों के पुनर्चक्रण का लक्ष्य, शिपबिल्डिंग पर 8 अरब डॉलर निवेश

भारत का 10 साल में 16 हजार जहाजों के पुनर्चक्रण का लक्ष्य, शिपबिल्डिंग पर 8 अरब डॉलर निवेश

भारत ने अगले 10 वर्षों में लगभग 16 हजार जहाजों के पुनर्चक्रण का लक्ष्य तय किया है और शिपबिल्डिंग तथा शिप रीसाइक्लिंग क्षेत्र को मजबूत करने के लिए 8 अरब डॉलर की वित्तीय प्रतिबद्धता भी जताई है। यह जानकारी केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने दी। उनके अनुसार, यह कदम समुद्री क्षेत्र में भारत की क्षमता बढ़ाने, घरेलू जहाज निर्माण को प्रोत्साहन देने और पुनर्चक्रण उद्योग को अधिक व्यवस्थित एवं प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। उद्योग विशेषज्ञों के मुताबिक वैश्विक स्तर पर अगले दशक में बड़ी संख्या में पुराने जहाजों के बेड़े से बाहर होने की संभावना है, और ऐसे में भारत के पास इस बाजार में अपनी हिस्सेदारी और मजबूत करने का अवसर है। देश पहले ही जहाज पुनर्चक्रण के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की स्थिति हासिल कर चुका है, और अब सरकार इस बढ़त को दीर्घकालिक औद्योगिक लाभ में बदलना चाहती है। इस योजना के साथ जुड़े ढांचे में तकनीकी उन्नयन, पर्यावरणीय मानकों का पालन, सुरक्षित रीसाइक्लिंग प्रक्रियाएं और आधुनिक यार्डों का विकास शामिल है। सरकार ने पहले ही इस क्षेत्र को औपचारिक और अधिक सुरक्षित बनाने के लिए विभिन्न नीतिगत कदम उठाए हैं, जिनमें नियामकीय व्यवस्था और क्रेडिट नोट आधारित प्रोत्साहन शामिल हैं। प्रस्तावित निवेश से न केवल रीसाइक्लिंग क्षमता बढ़ने की उम्मीद है, बल्कि घरेलू शिपबिल्डिंग को भी बढ़ावा मिल सकता है, क्योंकि पुनर्चक्रण से मिलने वाले संसाधनों और प्रोत्साहनों का उपयोग नए जहाजों के निर्माण में किया जा सकेगा। इस योजना को भारत की ब्लू इकोनॉमी, औद्योगिक उत्पादन, रोजगार सृजन और समुद्री अवसंरचना के विस्तार से जोड़कर देखा जा रहा है।

by Dainikshamtak on | 2026-07-03 22:31:49

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