भारत सरकार ने घरेलू ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने और आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से 'समुद्र मंथन' (Samudra Manthan) पहल के तहत 2.5 लाख वर्ग किलोमीटर के अब तक अन्वेषण न किए गए (Unexplored) क्षेत्रों को तेल एवं गैस खोज के लिए खोलने का निर्णय लिया है। सरकार का मानना है कि इस पहल से अपतटीय (Offshore) और अन्य संभावित क्षेत्रों में नए हाइड्रोकार्बन भंडारों की खोज को गति मिलेगी तथा देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलेगी। भारत वर्तमान में अपनी तेल आवश्यकता का बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। सरकार का उद्देश्य घरेलू अन्वेषण गतिविधियों को बढ़ावा देकर इस निर्भरता को धीरे-धीरे कम करना है। विशेषज्ञों के अनुसार नए क्षेत्रों को खोज और उत्पादन के लिए उपलब्ध कराने से सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की ऊर्जा कंपनियों के लिए निवेश के नए अवसर पैदा होंगे। यह पहल उन्नत भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण, आधुनिक अन्वेषण तकनीकों और गहरे समुद्री संसाधनों के विकास को भी प्रोत्साहित करेगी। ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इन क्षेत्रों में व्यावसायिक रूप से उपयोगी तेल और गैस भंडार मिलते हैं, तो इससे भारत के ऊर्जा आयात बिल में कमी आ सकती है और दीर्घकाल में ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होगी। इसके अलावा इस क्षेत्र में निवेश बढ़ने से रोजगार, तकनीकी विकास और संबंधित उद्योगों को भी लाभ मिलने की संभावना है। सरकार पहले भी अन्वेषण एवं लाइसेंसिंग नीति में सुधार कर निजी और विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए कई कदम उठा चुकी है। 'समुद्र मंथन' पहल को उसी रणनीति का विस्तार माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा मांग में लगातार वृद्धि को देखते हुए घरेलू संसाधनों का अधिकतम उपयोग भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। आने वाले समय में इन क्षेत्रों के लिए अन्वेषण लाइसेंस, निवेश और परियोजनाओं से संबंधित विस्तृत जानकारी जारी किए जाने की उम्मीद है।
by Dainikshamtak on | 2026-07-06 13:47:56