पश्चिम बंगाल सरकार ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए जलपाईगुड़ी जिले में लगभग 312 मीटर लंबे सीमा भूमि खंड को सीमा सुरक्षा बल (BSF) को सौंप दिया है। यह हस्तांतरण लंबे समय से लंबित भूमि संबंधी विवादों के समाधान के बाद संभव हो पाया। इसके अलावा राज्य सरकार ने भारत-बांग्लादेश सीमा से लगे 9 जिलों में कुल 142.79 एकड़ भूमि भी बीएसएफ को हस्तांतरित की है। सरकार के अनुसार इस निर्णय का उद्देश्य सीमा सुरक्षा से जुड़े बुनियादी ढांचे के विकास, सीमा बाड़ (Border Fencing), गश्त, सड़क निर्माण और सुरक्षा चौकियों को मजबूत करना है। भारत-बांग्लादेश सीमा देश की सबसे संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय सीमाओं में से एक मानी जाती है, जहां तस्करी, अवैध घुसपैठ और सीमा पार अपराधों को रोकने के लिए लगातार सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाता रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि आवश्यक भूमि उपलब्ध होने से बीएसएफ को सीमा प्रबंधन से जुड़ी परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने में सहायता मिलेगी। इससे सीमा पर निगरानी क्षमता बढ़ेगी और सुरक्षा बलों की आवाजाही भी अधिक सुगम होगी। भूमि हस्तांतरण से सीमा बाड़ निर्माण और अन्य अवसंरचनात्मक परियोजनाओं में आ रही प्रशासनिक बाधाओं के दूर होने की उम्मीद है। सुरक्षा मामलों के जानकारों के अनुसार प्रभावी सीमा प्रबंधन केवल राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ही नहीं, बल्कि सीमा क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा और विकास के लिए भी महत्वपूर्ण है। सरकार का कहना है कि केंद्र और राज्य एजेंसियों के बीच समन्वय के माध्यम से सीमा अवसंरचना को और मजबूत किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के कदम सीमा सुरक्षा बल की परिचालन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ भारत-बांग्लादेश सीमा पर दीर्घकालिक सुरक्षा व्यवस्था को और प्रभावी बनाने में मदद करेंगे। आने वाले समय में सीमा से जुड़ी अन्य विकास परियोजनाओं पर भी तेजी से काम किए जाने की संभावना है।
by Dainikshamtak on | 2026-07-06 13:44:06