ओडिशा सरकार और जापानी साझेदारों के बीच 8 अरब अमेरिकी डॉलर के ग्रीन एनर्जी निवेश समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस समझौते का उद्देश्य राज्य में स्वच्छ ऊर्जा अवसंरचना का विकास, हरित औद्योगिकीकरण को बढ़ावा देना और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में दीर्घकालिक निवेश को आकर्षित करना है। प्रस्तावित सहयोग के तहत हरित हाइड्रोजन, हरित अमोनिया, नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन, ऊर्जा भंडारण (Energy Storage), औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन तथा संबंधित अवसंरचना के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता ओडिशा को भारत के प्रमुख ग्रीन एनर्जी केंद्रों में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। राज्य पहले से ही इस्पात, खनन, बंदरगाह और भारी उद्योगों का प्रमुख केंद्र है। अब स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं में बड़े निवेश से औद्योगिक विकास के साथ-साथ कार्बन उत्सर्जन कम करने में भी सहायता मिलेगी। आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार इस निवेश से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों रोजगार के अवसर उत्पन्न हो सकते हैं तथा स्थानीय उद्योगों और आपूर्ति श्रृंखला को भी लाभ मिलेगा। भारत ने वर्ष 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन का लक्ष्य निर्धारित किया है और ग्रीन हाइड्रोजन मिशन सहित कई राष्ट्रीय कार्यक्रमों के माध्यम से स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा दिया जा रहा है। जापान भी स्वच्छ ऊर्जा, हाइड्रोजन तकनीक और हरित औद्योगिक परियोजनाओं में वैश्विक अग्रणी देशों में शामिल है। ऐसे में दोनों पक्षों के बीच यह साझेदारी तकनीकी सहयोग, निवेश और नवाचार को नई दिशा दे सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि परियोजनाएं निर्धारित समय पर लागू होती हैं, तो ओडिशा वैश्विक ग्रीन एनर्जी आपूर्ति श्रृंखला में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। यह समझौता भारत-जापान आर्थिक सहयोग को भी और मजबूत करेगा तथा ऊर्जा सुरक्षा, सतत विकास और हरित अर्थव्यवस्था की दिशा में दोनों देशों के साझा लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में सहायक होगा।
by Dainikshamtak on | 2026-07-06 13:49:40