पीएम मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान भारत-ऑस्ट्रेलिया यूरेनियम आपूर्ति समझौते को मिल सकती है अंतिम मंजूरी

पीएम मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान भारत-ऑस्ट्रेलिया यूरेनियम आपूर्ति समझौते को मिल सकती है अंतिम मंजूरी


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस सप्ताह मेलबर्न यात्रा के दौरान भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच व्यावसायिक यूरेनियम आपूर्ति समझौते (Commercial Uranium Supply Agreement) को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है। यदि यह समझौता संपन्न होता है, तो यह दोनों देशों के बीच रणनीतिक ऊर्जा सहयोग को नई मजबूती देगा और भारत के असैन्य परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जाएगा। ऑस्ट्रेलिया विश्व के सबसे बड़े यूरेनियम भंडार वाले देशों में शामिल है, जबकि भारत अपनी बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए परमाणु ऊर्जा उत्पादन का विस्तार कर रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार यह समझौता भारत के परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के लिए दीर्घकालिक ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करने में सहायक हो सकता है। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच पिछले कुछ वर्षों में रक्षा, व्यापार, महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals), शिक्षा, समुद्री सुरक्षा और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग लगातार मजबूत हुआ है। दोनों देश व्यापक रणनीतिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership) के तहत कई क्षेत्रों में मिलकर कार्य कर रहे हैं। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यूरेनियम आपूर्ति समझौता भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। परमाणु ऊर्जा को कम कार्बन उत्सर्जन वाला ऊर्जा स्रोत माना जाता है और भारत वर्ष 2070 तक नेट-ज़ीरो लक्ष्य हासिल करने के लिए अपने ऊर्जा मिश्रण में इसकी हिस्सेदारी बढ़ाने पर काम कर रहा है। विश्लेषकों के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान व्यापार, निवेश, तकनीकी सहयोग और महत्वपूर्ण खनिजों से जुड़े अन्य समझौतों की भी घोषणा हो सकती है। हालांकि यूरेनियम आपूर्ति समझौते पर अंतिम निर्णय दोनों देशों के बीच औपचारिक हस्ताक्षर और आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा। यदि यह समझौता संपन्न होता है, तो भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों में यह एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जाएगा।

by Dainikshamtak on | 2026-07-07 13:37:47

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