भारत सरकार ने बीमा क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधार करते हुए भारतीय बीमा कंपनियों में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को स्वचालित मार्ग से मंजूरी दे दी। वित्त मंत्रालय ने शनिवार को जारी अधिसूचना में स्पष्ट किया कि अब विदेशी निवेशक पूर्व सरकार अनुमति के बिना बीमा कंपनियों में पूर्ण स्वामित्व प्राप्त कर सकेंगे। हालांकि लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया में विदेशी निवेश 20 प्रतिशत की सीमा पर ही रहेगा। इस निर्णय से बीमा क्षेत्र में पूंजी प्रवाह बढ़ेगा और क्षेत्र का विस्तार होगा। अधिसूचना के अनुसार विदेशी निवेशक पेड-अप इक्विटी पूंजी का 100 प्रतिशत तक निवेश कर सकेंगे। भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण की मंजूरी आवश्यक होगी। अधिसूचना में यह भी उल्लेख किया गया कि विदेशी निवेश वाली किसी भी भारतीय बीमा कंपनी में बोर्ड के अध्यक्ष, प्रबंध निदेशक या मुख्य कार्यकारी अधिकारी में से कम से कम एक भारतीय निवासी नागरिक होना चाहिए। बीमा मध्यस्थों जैसे बीमा ब्रोकर, पुनर्बीमा ब्रोकर, कॉर्पोरेट एजेंट, थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर, सर्वेयर और लॉस असेसर आदि संस्थाओं में भी 100 प्रतिशत FDI की अनुमति होगी। यह सुधार पिछले वर्ष संसद में पारित बीमा संशोधन विधेयक के बाद संभव हुआ। बीमा घनत्व और प्रवेश बढ़ाने के उद्देश्य से यह कदम महत्वपूर्ण है। वर्तमान में बीमा क्षेत्र में कुल प्रीमियम आय 10 लाख करोड़ रुपये के आसपास है। विदेशी कंपनियों के पूर्ण स्वामित्व से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और ग्राहकों को बेहतर सेवाएं मिलेंगी। LIC के लिए अलग सीमा इसलिए रखी गई क्योंकि यह सार्वजनिक क्षेत्र का प्रमुख संस्थान है। सरकार का लक्ष्य 2047 तक बीमा क्षेत्र को विकसित बनाना है।
by Dainikshamtak on | 2026-05-03 19:51:19