जर्मनी ने भारत को भविष्य युद्धक वायु प्रणाली (FCAS) कार्यक्रम में शामिल होने के लिए खुला रुख अपनाया है। यह छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान विकास परियोजना जर्मनी, फ्रांस और स्पेन के नेतृत्व में चल रही है। जर्मन अधिकारियों ने कहा कि भारत की भागीदारी से कार्यक्रम को तकनीकी और वित्तीय मजबूती मिलेगी। FCAS में अनस्वीवर एरियल व्हीकल्स, ड्रोन स्वार्म, कंबैट क्लाउड और उन्नत स्टील्थ तकनीक शामिल हैं। 2035 तक सेवा में आने का लक्ष्य है। जर्मनी-फ्रांस के बीच कार्य-विभाजन विवाद के कारण कार्यक्रम अटका हुआ था। भारत की भागीदारी इस संकट का समाधान हो सकती। भारत पहले ऑब्जर्वर स्थिति चाहता था लेकिन अब पूर्ण भागीदार बनने की चर्चा। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड और निजी क्षेत्र कंपनियां आपूर्ति श्रृंखला में योगदान दे सकेंगी। एवियोनिक्स, सेंसर और सामग्री इंजीनियरिंग में सहयोग संभव। भारत के एमआरएफए कार्यक्रम में राफेल और यूरोफाइटर प्रतिस्पर्धा कर रहे। FCAS भागीदारी से तकनीकी हस्तांतरण बढ़ेगा। जर्मनी ने भारत को यूरोपीय रक्षा पारिस्थितिकी में महत्वपूर्ण माना। आत्मनिर्भर भारत के तहत यह कदम रणनीतिक है। भारत का अपना पांचवीं पीढ़ी का AMCA कार्यक्रम चल रहा। FCAS से छठी पीढ़ी तकनीक हासिल होगी। जर्मन चिंता थी तकनीकी पहुंच और औद्योगिक भागीदारी। भारत मजबूत उत्पादन क्षमता वाला देश। यह कदम भारत-यूरोप रक्षा सहयोग को नई ऊंचाई देगा। फ्रांस और स्पेन की सहमति आवश्यक। कार्यक्रम में सऊदी अरब और पोलैंड भी रुचि दिखा रहे। भारत की भागीदारी वैश्विक रक्षा बाजार में नई संभावनाएं खोलेगी।
by Dainikshamtak on | 2026-05-04 16:03:22