भारत सरकार पर्यटन क्षेत्र में क्रांतिकारी कदम उठाते हुए 'एक द्वीप, एक रिसॉर्ट' अवधारणा पर काम कर रही है। इसका उद्देश्य अंडमान-निकोबार, लक्षद्वीप, दमन-दीव सहित देश के 1300 से अधिक अप्रयुक्त तटवर्ती द्वीपों का टिकाऊ इको-टूरिज्म विकास करना है। इनमें 289 चट्टानी टापू भी शामिल हैं। नीति के तहत प्रत्येक चयनित द्वीप पर केवल एक ही लग्जरी रिसॉर्ट विकसित किया जाएगा। मालदीव की तर्ज पर यह योजना पर्यटकों को निजता और प्रकृति के साथ लग्जरी अनुभव प्रदान करेगी। पर्यटन मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि निजी कंपनियों के सहयोग से जैव-विविधता संरक्षण के साथ उच्च गुणवत्ता वाले पर्यटन स्थलों का निर्माण होगा। नीति आयोग की पुरानी व्यवहार्यता अध्ययन पर आधारित यह योजना अंतिम चरण में है। गृह, पर्यावरण और रक्षा मंत्रालयों के समन्वय से कार्यान्वयन होगा। अंडमान में शहीद द्वीप, एव्स और लॉन्ग द्वीप पर इको-टूरिज्म प्रोजेक्ट्स पीपीपी मोड पर विकसित हो रहे। लक्षद्वीप के बंगारम, थिनाकारा, चरियम जैसे द्वीपों पर वाटर विला, बीच विला और इको कॉटेज बनेंगे। राधानगर बीच को ब्लू फ्लैग प्रमाणन मिल चुका। पर्यटन मंत्रालय ने 10 अन्य बीचों का चयन किया। यह योजना स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगी। स्नॉर्कलिंग, डाइविंग, बर्ड वॉचिंग जैसी गतिविधियों से रोजगार सृजन होगा। सरकार ने कैरवान टूरिज्म, लग्जरी टेंट, हाउसबोट टूरिज्म को भी बढ़ावा दिया। द्वीपों में हरित ऊर्जा, मत्स्य पालन और जैव-विविधता संरक्षण पर जोर। पर्यटकों की संख्या सीमित रखकर पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित होगा। यह योजना भारत को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करेगी।
by Dainikshamtak on | 2026-05-03 19:50:28