भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय व्यापार ने नया रिकॉर्ड बनाते हुए लगभग 68.7 अरब अमेरिकी डॉलर का आंकड़ा छू लिया है। हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक संबंध लगातार मजबूत हुए हैं, जिसका सीधा असर व्यापारिक आंकड़ों में देखा जा रहा है। ऊर्जा, रक्षा, उर्वरक, कोयला, तेल, गैस, मशीनरी और कृषि उत्पाद जैसे क्षेत्रों में व्यापार में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विशेष रूप से रूस से भारत के कच्चे तेल आयात में तेज वृद्धि इस रिकॉर्ड व्यापार का प्रमुख कारण मानी जा रही है। रूस भारत के लिए सस्ते और स्थिर ऊर्जा स्रोत के रूप में उभरा है, जबकि भारत से रूस को फार्मास्युटिकल्स, चाय, कॉफी, समुद्री उत्पाद, मशीनरी और अन्य उपभोक्ता वस्तुओं का निर्यात बढ़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिमी देशों द्वारा रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों के बाद भारत और रूस के बीच वैकल्पिक भुगतान तंत्र और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ने से यह आंकड़ा तेजी से ऊपर गया है। दोनों देश लंबे समय से रणनीतिक साझेदार रहे हैं और ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग तथा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर समन्वय बनाए रखते हैं। हाल ही में दोनों सरकारों ने आने वाले वर्षों में व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य भी रखा है। भारत-रूस व्यापार में यह वृद्धि भारत की ऊर्जा सुरक्षा और रूस के लिए बड़े एशियाई बाजार तक पहुंच का संकेत मानी जा रही है। हालांकि, व्यापार असंतुलन को लेकर भारत की चिंता भी बनी हुई है, क्योंकि रूस से आयात भारत के निर्यात की तुलना में काफी अधिक है। इसके बावजूद यह रिकॉर्ड आंकड़ा दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में नई मजबूती और बदलते वैश्विक व्यापार समीकरणों को दर्शाता है। आने वाले समय में निवेश, लॉजिस्टिक्स और नए सेक्टरों में सहयोग बढ़ने की संभावना है।
by Dainikshamtak on | 2026-04-23 16:20:54