राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने हिंदू समाज में व्याप्त अस्पृश्यता और भेदभाव के ऐतिहासिक कुप्रथा पर गहरा प्रहार किया। हालिया कार्यक्रम में उन्होंने कहा, "हिंदू समाज का एक वर्ग लगभग दो हजार वर्षों तक अस्पृश्यता और भेदभाव सहता रहा।" भागवत ने सामाजिक समानता सुनिश्चित करने के लिए आरक्षण को आवश्यक माना और कहा कि "समान अधिकार दिलाने के लिए यदि 200 वर्षों तक आरक्षण आवश्यक हो तो समाज इसके लिए तैयार रहना चाहिए।" उन्होंने जोर दिया कि "अपने भाइयों को ऊपर उठाने के लिए कुछ बलिदान देना पड़े तो पीछे नहीं हटना चाहिए।"भागवत ने जातिवाद को हिंदू समाज का सबसे बड़ा अभिशाप बताया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के 75 वर्ष बाद भी समाज का एक वर्ग उपेक्षित है। RSS ने हमेशा जाति भेद मिटाने पर जोर दिया है। भागवत ने सामाजिक सद्भाव के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता बताई। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे सामाजिक समरसता के सिपाही बनें।यह बयान आरक्षण विवाद के बीच आया जब सुप्रीम कोर्ट ने OBC/EWS आरक्षण सीमा पर फैसला सुरक्षित रखा। भागवत ने कहा कि आरक्षण का विरोध करने वाले समाज को आत्म परीक्षण करना चाहिए। उन्होंने मनुस्मृति जैसे ग्रंथों की गलत व्याख्या पर चिंता जताई। RSS ने अतीत में भी आरक्षण का समर्थन किया है। भागवत ने कहा कि जब तक समाज का अंतिम व्यक्ति मुख्यधारा से जुड़ न जाए तब तक आरक्षण जारी रहना चाहिए।भागवत का यह बयान BJP के कुछ नेताओं के आरक्षण विरोधी बयानों के बाद आया। विपक्ष ने इसे राजनीतिक रोटियां सेंकने का हथकंडा बताया। RSS ने स्पष्ट किया कि यह वैचारिक प्रतिबद्धता है। हिंदुत्व का अर्थ समावेशी समाज निर्माण है। भागवत ने हिंदू एकता के लिए जाति भेद त्यागने का आह्वान किया। यह बयान हिंदू समाज में सुधारवादी दृष्टिकोण को मजबूत करेगा। सामाजिक न्याय के लिए RSS की प्रतिबद्धता दोहराई।
by Dainikshamtak on | 2026-02-25 01:26:03