भारतीय अर्थव्यवस्था में नकदी का महत्व आज भी बरकरार है। RBI के आंकड़ों के अनुसार फरवरी 2016 में मुद्रा परिसंचरण ₹16.42 लाख करोड़ था जो फरवरी 2020 में बढ़कर ₹24.2 लाख करोड़ और फरवरी 2026 तक ₹40 लाख करोड़ तक पहुंच गया। यह वृद्धि UPI लेनदेन के रिकॉर्ड स्तर के बावजूद हुई जब डिजिटल भुगतान ने ₹28 लाख करोड़ मासिक मूल्य पार कर लिया। नकदी-GDP अनुपात 11.2% पर स्थिर है जो 2021 के 14.4% से काफी कम है।SBI रिसर्च के अनुसार जनवरी 2026 में नकदी परिसंचरण ने रिकॉर्ड ₹40 लाख करोड़ का आंकड़ा छुआ। ग्रामीण क्षेत्रों में नकदी पकड़ बढ़ी, ATM निकासी में उछाल आया। कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, केरल में UPI लेनदेन पर GST नोटिस के बाद व्यापारियों ने नकदी पर लौटना शुरू किया। कम ब्याज दरों ने भी उपभोग को बढ़ावा दिया। सोना-चांदी बिक्री से तरलता बढ़ी।UPI ने 70% डिजिटल लेनदेन संभाल लिया फिर भी नकदी राजा बनी हुई। जनवरी 2026 में 2170 करोड़ UPI लेनदेन हुए। दैनिक औसत 70 करोड़ लेनदेन। नकदी मुख्यतः भंडारण, ग्रामीण खपत, अनौपचारिक अर्थव्यवस्था के लिए उपयोग हो रही। नोटबंदी के 9 वर्ष बाद भी नकदी दोहरी हुई। डेमो के तुरंत बाद GDP प्रभावित हुआ लेकिन अब संतुलन बना।RBI ने पर्याप्त तरलता सुनिश्चित की। नकदी बढ़ने के बावजूद अर्थव्यवस्था डिजिटल पर अधिक निर्भर हो गई। छोटे व्यापारियों में टैक्स चिंता से नकदी प्राथमिकता। ग्रामीण अर्थव्यवस्था अभी भी नकदी आधारित। सरकार डिजिटल पुश जारी रखेगी लेकिन नकदी का महत्व कम नहीं हुआ। यह सह-अस्तित्व भारतीय अर्थव्यवस्था की अनूठी विशेषता है। भविष्य में CBDC के साथ संतुलन बनेगा। नकदी राजा बनी रहेगी।
by Dainikshamtak on | 2026-02-25 01:12:57