सरकार का स्पष्टीकरण: NEET-PG रैंकिंग परीक्षा है, न्यूनतम योग्यता मापक नहीं

सरकार का स्पष्टीकरण: NEET-PG रैंकिंग परीक्षा है, न्यूनतम योग्यता मापक नहीं

सरकार ने NEET-PG कटऑफ कम करने के विवाद पर स्पष्ट किया कि यह परीक्षा सीट आवंटन के लिए रैंकिंग परीक्षा है, न कि न्यूनतम योग्यता का मापक। सभी उम्मीदवार पहले से ही MBBS डॉक्टर हैं। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा गया कि NEET-PG पोस्टग्रेजुएट कोर्स में प्रवेश के लिए रैंक निर्धारित करता है। यह न्यूनतम मानकों का परीक्षण नहीं करता। NBEMS ने सामान्य श्रेणी के लिए 50वें पर्सेंटाइल को 7वें और आरक्षित श्रेणी के लिए 0वें पर्सेंटाइल तक कम किया। इससे 95,913 अतिरिक्त उम्मीदवार काउंसलिंग के लिए पात्र बने।विवाद तब शुरू हुआ जब NBEMS ने राउंड 3 काउंसलिंग से पहले कटऑफ घटाया। सामान्य श्रेणी का कटऑफ 276 से घटकर 103 अंक और आरक्षित श्रेणी में -40 तक हो गया। डॉक्टर संगठनों ने इसका विरोध किया। FAIMA और FORDA ने मरीजों की सुरक्षा और मेरिट पर सवाल उठाए। सुप्रीम कोर्ट में PIL दायर हुई। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि कमजोर उम्मीदवारों को PG ट्रेनिंग देने से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होंगी।सरकार ने कहा कि 18,000 PG सीटें खाली पड़ी हैं। कटऑफ कम करना प्रशासनिक आवश्यकता है। MBBS पास उम्मीदवार पहले से ही योग्य हैं। रैंकिंग के आधार पर ही सीटें मिलेंगी। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, NBEMS और NMC को नोटिस जारी किया। सुनवाई 27 फरवरी को होगी।विवाद ने चिकित्सा शिक्षा प्रणाली पर सवाल उठाए। विशेषज्ञों का कहना है कि खाली सीटें भरना जरूरी लेकिन मानक कमजोर नहीं होने चाहिए। सरकार ने पारदर्शिता का दावा किया। FAIMA ने कहा कि निजी कॉलेजों को फायदा पहुंचाने की साजिश है। NEET-PG 2025 में 2.24 लाख उम्मीदवार योग्य हुए। यह निर्णय स्वास्थ्य सेवाओं और मेरिट के बीच संतुलन का प्रश्न उठाता है। भविष्य में नीतिगत सुधार जरूरी। 

by Dainikshamtak on | 2026-02-25 01:12:02

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