एनसीईआरटी ने कक्षा 8 SSC पाठ्यपुस्तक में न्यायिक भ्रष्टाचार, केस बैकलॉग अध्याय जोड़ा

एनसीईआरटी ने कक्षा 8 SSC पाठ्यपुस्तक में न्यायिक भ्रष्टाचार, केस बैकलॉग अध्याय जोड़ा

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान पाठ्यपुस्तक में नया अध्याय जोड़ा है जो न्यायपालिका में भ्रष्टाचार और केसों के विशाल बैकलॉग पर चर्चा करता है। 23 फरवरी 2026 को जारी नई पुस्तक के 'हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका' अध्याय में पहली बार न्यायपालिका के विभिन्न स्तरों पर भ्रष्टाचार को चुनौतियों के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। अध्याय में सुप्रीम कोर्ट में 81,000, हाईकोर्ट में 62.4 लाख और निचली अदालतों में 4.7 करोड़ मामले लंबित होने का उल्लेख है। कारणों में जजों की कमी, जटिल कानूनी प्रक्रियाएं और खराब बुनियादी ढांचा शामिल हैं।अध्याय बताता है कि जजों के आचरण संहिता कोर्ट के अंदर-बाहर व्यवहार नियंत्रित करती है। शिकायतें सेंट्रलाइज्ड पब्लिक ग्रिवांस रिड्रेस एंड मॉनिटरिंग सिस्टम (CPGRAMS) पर दर्ज होती हैं। 2017-2021 के बीच 1600 से अधिक शिकायतें मिलीं। गंभीर मामलों में संसद महाभियोग प्रस्ताव पारित कर जज हटा सकती है। पूर्व CJI बीआर गावई के जुलाई 2025 के बयान का उद्धरण दिया गया है कि भ्रष्टाचार से जनता का विश्वास डगमगाता है लेकिन पारदर्शिता से इसे बहाल किया जा सकता है।पुरानी किताबें न्यायपालिका की संरचना पर केंद्रित थीं। नई संस्करण न्यायिक जवाबदेही, शक्ति संतुलन और तकनीकी उपयोग पर विस्तार करता है। अध्याय कहता है कि गरीबों के लिए भ्रष्टाचार न्याय तक पहुंच बाधित करता है। राज्य-केंद्र सरकारें पारदर्शिता बढ़ा रही हैं। कपिल सिबाल ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया कि राजनीतिक भ्रष्टाचार क्यों नहीं पढ़ाया जा रहा। पुस्तक बाजार में उपलब्ध नहीं हुई क्योंकि विवाद बढ़ा।यह परिवर्तन छात्रों में आलोचनात्मक सोच विकसित करेगा। न्यायपालिका को आदर्श के साथ चुनौतियों के रूप में दिखाना नया दृष्टिकोण है। पारदर्शिता और जवाबदेही लोकतांत्रिक गुण हैं। अध्याय वास्तविक मुद्दों से छात्रों को परिचित कराएगा।

by Dainikshamtak on | 2026-02-25 01:14:01

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