राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा है कि आरएसएस हिंदुत्व की राजनीति नहीं करता और संगठन का उद्देश्य व्यक्ति निर्माण है। उन्होंने कहा कि संघ का कार्य समाज के विभिन्न वर्गों में चरित्र निर्माण, संगठन और सेवा गतिविधियों के माध्यम से व्यक्तिगत विकास को बढ़ावा देना है। भागवत ने स्पष्ट किया कि आरएसएस स्वयं को एक सांस्कृतिक संगठन के रूप में देखता है, जिसका लक्ष्य समाज में अनुशासन, सामाजिक समरसता और राष्ट्रभाव को सुदृढ़ करना है। उनके बयान को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है जब हिंदुत्व और राजनीति को लेकर सार्वजनिक विमर्श जारी है। उन्होंने कहा कि संघ की गतिविधियां दीर्घकालिक सामाजिक परिवर्तन और व्यक्ति के समग्र विकास पर केंद्रित हैं। आरएसएस की स्थापना 1925 में हुई थी और संगठन देशभर में शाखाओं और सेवा परियोजनाओं के माध्यम से सक्रिय है। भागवत ने कहा कि संगठन का कार्य राजनीतिक सत्ता प्राप्ति से अलग है और उसका प्राथमिक उद्देश्य समाज में सकारात्मक मूल्यों को प्रोत्साहित करना है। बयान के बाद विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा देखी गई है। आरएसएस से जुड़े विषय समय-समय पर सार्वजनिक बहस का हिस्सा रहे हैं। भागवत की टिप्पणी को संगठन की भूमिका और उद्देश्य पर स्पष्टीकरण के रूप में देखा जा रहा है।
by Dainikshamtak on | 2026-02-24 00:05:10