भारत के चालू खाते में 7.1 अरब डॉलर का अधिशेष, सेवा निर्यात और प्रवासी भारतीयों की मजबूत आमदनी से अर्थव्यवस्था को बल

भारत के चालू खाते में 7.1 अरब डॉलर का अधिशेष, सेवा निर्यात और प्रवासी भारतीयों की मजबूत आमदनी से अर्थव्यवस्था को बल

भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत के रूप में वित्त वर्ष 2025-26 की जनवरी से मार्च तिमाही में देश का चालू खाता 7.1 अरब अमेरिकी डॉलर के अधिशेष में दर्ज किया गया है, जो सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का लगभग 0.7 प्रतिशत है। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार इस अधिशेष का प्रमुख कारण सेवा क्षेत्र के मजबूत निर्यात और विदेशों में कार्यरत भारतीयों द्वारा भेजी गई रिकॉर्ड स्तर की धनराशि यानी प्रेषण रहा। सूचना प्रौद्योगिकी, व्यवसायिक सेवाओं, वित्तीय सेवाओं और अन्य पेशेवर सेवाओं के निर्यात में लगातार वृद्धि ने भारत के सेवा क्षेत्र को मजबूती प्रदान की है। इसके साथ ही खाड़ी देशों, अमेरिका, यूरोप और अन्य क्षेत्रों में कार्यरत भारतीयों द्वारा भेजी गई धनराशि ने भी चालू खाते की स्थिति को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। चालू खाता किसी देश के वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार, निवेश आय तथा प्रेषण के प्रवाह का महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है। जब किसी देश का चालू खाता अधिशेष में होता है, तो इसका अर्थ है कि विदेशी मुद्रा का आगमन उसके बहिर्गमन से अधिक रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति भारतीय रुपये की स्थिरता, विदेशी मुद्रा भंडार की मजबूती और बाह्य क्षेत्र की वित्तीय स्थिति के लिए सकारात्मक मानी जाती है। हालांकि वैश्विक व्यापार, कच्चे तेल की कीमतों, आयात मांग और भू-राजनीतिक परिस्थितियों में बदलाव का प्रभाव भविष्य की तिमाहियों पर पड़ सकता है। भारतीय अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र लगातार विकास का प्रमुख आधार बना हुआ है और सॉफ्टवेयर, परामर्श, डिजिटल सेवाओं तथा वैश्विक क्षमता केंद्रों की बढ़ती भूमिका ने निर्यात को नई गति दी है। वहीं प्रवासी भारतीयों द्वारा भेजी गई धनराशि घरेलू खपत और विदेशी मुद्रा प्रवाह दोनों के लिए महत्वपूर्ण स्रोत बनी हुई है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि सेवा निर्यात और प्रेषण की मौजूदा गति बनी रहती है तथा वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां अनुकूल रहती हैं, तो भारत का बाह्य क्षेत्र आने वाले समय में भी मजबूत स्थिति बनाए रख सकता है। यह उपलब्धि देश की व्यापक आर्थिक स्थिरता और वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में भारत की बढ़ती भूमिका का भी संकेत मानी जा रही है।

by Dainikshamtak on | 2026-07-26 23:39:11

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