राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) 2026 से जुड़े कथित पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं को लेकर कई सप्ताह से जारी छात्र आंदोलनों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। प्रधानमंत्री को भेजे गए अपने इस्तीफे में उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था में जनता के विश्वास को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उन्होंने यह निर्णय लिया है। हाल के दिनों में देश के विभिन्न हिस्सों में छात्रों, अभिभावकों और विभिन्न छात्र संगठनों द्वारा बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किए गए थे, जिनमें परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने, दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने तथा शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग की जा रही थी। आंदोलन के दौरान शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भी प्रमुख मुद्दों में शामिल रही। केंद्र सरकार ने इससे पहले पेपर लीक मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक अदालतों की घोषणा, परीक्षा प्रणाली में सुधार तथा जांच एजेंसियों द्वारा मामले की विस्तृत जांच जैसे कदम उठाए थे, लेकिन प्रदर्शन जारी रहे। इस्तीफे के बाद सरकार द्वारा शिक्षा मंत्रालय में प्रशासनिक बदलावों की प्रक्रिया भी तेज होने की संभावना है। राजनीतिक दलों ने इस घटनाक्रम पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी हैं। विपक्ष ने इसे छात्र आंदोलन की बड़ी सफलता बताया है, जबकि सरकार ने कहा है कि परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और सुरक्षित बनाने के लिए सुधारों की प्रक्रिया जारी रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम देश की परीक्षा प्रणाली में व्यापक संस्थागत सुधारों की आवश्यकता को रेखांकित करता है। आने वाले समय में राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी की कार्यप्रणाली, परीक्षा सुरक्षा तंत्र, डिजिटल निगरानी व्यवस्था और जवाबदेही से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े हितधारकों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि सरकार नए नेतृत्व के साथ परीक्षा सुधारों को किस प्रकार आगे बढ़ाती है और छात्रों का विश्वास दोबारा मजबूत करने के लिए कौन-कौन से ठोस कदम उठाए जाते हैं।
by Dainikshamtak on | 2026-07-25 15:34:00