केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद परीक्षा सुधारों को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन में नया घटनाक्रम सामने आया है। छात्र संगठन सीजेपी (कलेक्टिव जस्टिस प्लेटफॉर्म) के प्रतिनिधि अभिजीत दिपके ने कहा है कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बावजूद आंदोलन पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और संगठन की दो प्रमुख मांगें अभी भी लंबित हैं। उनके अनुसार छात्र केवल नेतृत्व परिवर्तन नहीं, बल्कि परीक्षा प्रणाली में व्यापक और संस्थागत सुधार चाहते हैं ताकि भविष्य में पेपर लीक और परीक्षा संबंधी अनियमितताओं की पुनरावृत्ति न हो। अभिजीत दिपके ने कहा कि संगठन सरकार के अगले कदमों पर नजर बनाए हुए है और जब तक लंबित मांगों पर स्पष्ट निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन की रणनीति पर विचार जारी रहेगा। हाल के दिनों में देश के विभिन्न हिस्सों में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के मामलों को लेकर बड़े पैमाने पर छात्र प्रदर्शन हुए थे। इन प्रदर्शनों में परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई थी। सरकार ने इस बीच परीक्षा सुरक्षा को मजबूत करने, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने तथा पेपर लीक के मामलों के लिए कठोर कानूनी प्रावधानों वाला विधेयक लाने जैसे कई कदमों की घोषणा की है। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी में प्रशासनिक सुधारों और परीक्षा प्रबंधन प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में भी पहल की गई है। दूसरी ओर छात्र संगठनों का कहना है कि केवल प्रशासनिक बदलाव पर्याप्त नहीं होंगे और दीर्घकालिक सुधारों को कानूनी तथा संस्थागत रूप दिया जाना चाहिए। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा प्रणाली में जनता और अभ्यर्थियों का विश्वास बहाल करने के लिए पारदर्शी प्रक्रियाएं, आधुनिक तकनीकी सुरक्षा, समयबद्ध जांच और जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक होगा। फिलहाल सरकार और छात्र संगठनों के बीच संवाद की प्रक्रिया जारी है तथा आगामी दिनों में लंबित मांगों पर होने वाले निर्णयों पर सभी की नजर बनी हुई है।
by Dainikshamtak on | 2026-07-25 15:40:09