भारत सरकार ने समुद्री क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। सरकार का उद्देश्य अगले दस वर्षों में लगभग 16,000 जहाजों की रीसाइक्लिंग करना और देश के जहाज निर्माण उद्योग के विस्तार के लिए 8 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश करना है। इस पहल का उद्देश्य भारत को वैश्विक जहाज निर्माण और जहाज रीसाइक्लिंग क्षेत्र में एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करना है। वर्तमान में भारत विश्व के प्रमुख जहाज रीसाइक्लिंग देशों में शामिल है और गुजरात के अलंग शिप ब्रेकिंग यार्ड को दुनिया के सबसे बड़े जहाज रीसाइक्लिंग केंद्रों में गिना जाता है। सरकार अब आधुनिक तकनीक, पर्यावरणीय मानकों और सुरक्षित कार्य प्रणाली के माध्यम से इस क्षेत्र की क्षमता को और बढ़ाने पर जोर दे रही है। प्रस्तावित निवेश का उपयोग नए शिपयार्ड विकसित करने, मौजूदा जहाज निर्माण सुविधाओं के आधुनिकीकरण, उन्नत तकनीक अपनाने, कुशल मानव संसाधन तैयार करने तथा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से भारी उद्योग, इस्पात, इंजीनियरिंग, बंदरगाह, लॉजिस्टिक्स और सहायक विनिर्माण क्षेत्रों को भी गति मिलेगी। जहाज रीसाइक्लिंग से प्राप्त इस्पात और अन्य धातुओं का पुनः उपयोग घरेलू उद्योगों के लिए कच्चे माल की उपलब्धता बढ़ाने में सहायक होगा, जिससे आयात पर निर्भरता कम हो सकती है। सरकार का यह कदम हरित अर्थव्यवस्था, परिपत्र अर्थव्यवस्था और टिकाऊ औद्योगिक विकास के लक्ष्यों के अनुरूप भी माना जा रहा है। इसके साथ ही भारत वैश्विक समुद्री व्यापार में अपनी रणनीतिक भूमिका को मजबूत करने, रोजगार के नए अवसर सृजित करने और निर्यात क्षमता बढ़ाने की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है। यदि निर्धारित निवेश और नीतिगत सुधार समयबद्ध तरीके से लागू होते हैं, तो आने वाले वर्षों में भारत जहाज निर्माण और जहाज रीसाइक्लिंग दोनों क्षेत्रों में विश्व के अग्रणी देशों में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है। सरकार का मानना है कि यह पहल देश की समुद्री अर्थव्यवस्था को नई गति देने के साथ-साथ विनिर्माण क्षेत्र और बंदरगाह आधारित विकास को भी महत्वपूर्ण बढ़ावा देगी।
by Dainikshamtak on | 2026-07-25 15:32:33