भारत सरकार देश में महत्वपूर्ण खनिजों और उच्च प्रौद्योगिकी विनिर्माण को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। इसी क्रम में आंध्र प्रदेश के तिरुपति जिले के नायडूपेटा में भारत का पहला एकीकृत रेयर अर्थ मैग्नेट निर्माण संयंत्र स्थापित किया जाएगा। इस परियोजना का उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहन, पवन ऊर्जा, रक्षा उपकरण, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, रोबोटिक्स, सेमीकंडक्टर, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य उच्च प्रौद्योगिकी उद्योगों के लिए आवश्यक रेयर अर्थ स्थायी मैग्नेट का घरेलू स्तर पर उत्पादन करना है। वर्तमान में इन मैग्नेटों के लिए भारत काफी हद तक आयात पर निर्भर है, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान आने पर उद्योगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। प्रस्तावित एकीकृत संयंत्र में रेयर अर्थ तत्वों के प्रसंस्करण से लेकर उच्च गुणवत्ता वाले स्थायी मैग्नेट के निर्माण तक की पूरी उत्पादन प्रक्रिया एक ही परिसर में विकसित की जाएगी। इससे भारत की आपूर्ति श्रृंखला अधिक मजबूत होगी और रणनीतिक क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा। सरकार का मानना है कि यह परियोजना राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन, मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसी पहलों को भी मजबूती प्रदान करेगी। विशेषज्ञों के अनुसार रेयर अर्थ मैग्नेट आधुनिक उद्योगों की रीढ़ माने जाते हैं क्योंकि इनका उपयोग उच्च दक्षता वाली विद्युत मोटरों, रक्षा प्रणालियों, मिसाइल तकनीक, ड्रोन, चिकित्सा उपकरणों और अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं में व्यापक रूप से होता है। इस संयंत्र की स्थापना से घरेलू विनिर्माण क्षमता बढ़ेगी, आयात पर निर्भरता कम होगी और भारत वैश्विक उच्च प्रौद्योगिकी आपूर्ति श्रृंखला में अपनी भूमिका को और मजबूत कर सकेगा। परियोजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के नए अवसर भी सृजित होने की उम्मीद है। राज्य सरकार और केंद्र सरकार के सहयोग से विकसित होने वाला यह संयंत्र आंध्र प्रदेश को उन्नत विनिर्माण और महत्वपूर्ण खनिज आधारित उद्योगों के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल भारत की दीर्घकालिक औद्योगिक और रणनीतिक क्षमता को नई दिशा देने वाली महत्वपूर्ण परियोजनाओं में से एक साबित हो सकती है।
by Dainikshamtak on | 2026-07-25 15:39:04