केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आयकर विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि ईमानदार करदाताओं के लिए कर अनुपालन प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी और करदाता-अनुकूल बनाया जाए। उन्होंने कहा कि आयकर प्रशासन का उद्देश्य केवल राजस्व संग्रह तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसा वातावरण तैयार करना भी होना चाहिए जिसमें ईमानदारी से कर चुकाने वाले नागरिकों और व्यवसायों को अनावश्यक जटिलताओं का सामना न करना पड़े। वित्त मंत्री ने अधिकारियों से करदाताओं के साथ संवेदनशील और पेशेवर व्यवहार अपनाने, शिकायतों के समयबद्ध निपटारे तथा तकनीक आधारित सेवाओं का अधिक प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार पिछले कुछ वर्षों से आयकर प्रणाली को डिजिटल, पारदर्शी और अधिक कुशल बनाने की दिशा में लगातार सुधार कर रही है। फेसलेस असेसमेंट, ऑनलाइन रिफंड, ई-फाइलिंग और डिजिटल शिकायत निवारण जैसी व्यवस्थाओं का उद्देश्य करदाताओं के अनुभव को बेहतर बनाना है। उन्होंने अधिकारियों से यह भी अपेक्षा की कि जांच और अनुपालन संबंधी कार्रवाई जोखिम-आधारित और साक्ष्य-आधारित हो, ताकि नियमों का पालन करने वाले करदाताओं को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े। वित्त मंत्रालय का मानना है कि सरल कर व्यवस्था से स्वैच्छिक कर अनुपालन को बढ़ावा मिलेगा, करदाताओं का विश्वास मजबूत होगा और देश के कर आधार का विस्तार भी संभव होगा। विशेषज्ञों के अनुसार कर प्रणाली को सरल और पारदर्शी बनाने से कारोबार करने में आसानी, निवेश को प्रोत्साहन तथा आर्थिक गतिविधियों में सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है। सरकार लगातार ऐसी नीतियों पर कार्य कर रही है जिनसे कर प्रशासन अधिक उत्तरदायी, तकनीक-संचालित और नागरिक केंद्रित बन सके। वित्त मंत्री के निर्देशों को इसी व्यापक सुधार प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। आयकर विभाग से अपेक्षा की गई है कि वह प्रक्रियाओं को सरल बनाने, विवादों को कम करने और ईमानदार करदाताओं के लिए अनुपालन को सहज बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए, जिससे करदाताओं और प्रशासन के बीच विश्वास तथा सहयोग की भावना और मजबूत हो सके।
by Dainikshamtak on | 2026-07-26 23:33:30