अगली पीढ़ी की एसएलसीएम के लिए DRDO करेगा नया परीक्षण, पनडुब्बी प्रक्षेपण की तैयारी तेज

अगली पीढ़ी की एसएलसीएम के लिए DRDO करेगा नया परीक्षण, पनडुब्बी प्रक्षेपण की तैयारी तेज

 रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) अगली पीढ़ी की सबमरीन लॉन्च क्रूज़ मिसाइल (एसएलसीएम) परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए एक अतिरिक्त भूमि आधारित विकासात्मक परीक्षण आयोजित करने की तैयारी कर रहा है। यह परीक्षण मिसाइल प्रणाली के विभिन्न तकनीकी मानकों, प्रणोदन प्रणाली, मार्गदर्शन तंत्र, उड़ान नियंत्रण और समग्र प्रदर्शन का मूल्यांकन करने के उद्देश्य से किया जाएगा। रक्षा सूत्रों के अनुसार भूमि आधारित परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा होने के बाद मिसाइल के वास्तविक पानी के भीतर पनडुब्बी से प्रक्षेपण परीक्षणों की दिशा में अगला चरण शुरू किया जाएगा। सबमरीन लॉन्च क्रूज़ मिसाइल भारत की समुद्री प्रतिरोधक क्षमता और रणनीतिक रक्षा ढांचे का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। ऐसी मिसाइलें समुद्र के भीतर संचालित पनडुब्बियों से प्रक्षेपित की जा सकती हैं, जिससे उनकी पहचान करना कठिन हो जाता है और रणनीतिक अभियानों में परिचालन क्षमता बढ़ती है। डीआरडीओ चरणबद्ध तरीके से इस परियोजना के सभी तकनीकी पहलुओं का परीक्षण कर रहा है ताकि वास्तविक परिचालन परिस्थितियों में प्रणाली की विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा सके। भूमि आधारित परीक्षण के दौरान प्रक्षेपण तंत्र, नेविगेशन प्रणाली, इंजन प्रदर्शन, उड़ान स्थिरता और लक्ष्य तक पहुंचने की क्षमता सहित कई महत्वपूर्ण मानकों का विश्लेषण किया जाएगा। परीक्षणों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर आवश्यक तकनीकी सुधार किए जाएंगे और उसके बाद पानी के भीतर पनडुब्बी से प्रक्षेपण परीक्षण किए जाएंगे। भारत पिछले कुछ वर्षों में स्वदेशी मिसाइल प्रौद्योगिकी, समुद्री रक्षा प्रणालियों और रणनीतिक हथियारों के विकास पर लगातार निवेश बढ़ा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगली पीढ़ी की एसएलसीएम प्रणाली भारतीय नौसेना की समुद्री मारक क्षमता और प्रतिरोधक शक्ति को और मजबूत करेगी। यह परियोजना आत्मनिर्भर भारत और रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक विकसित करने की नीति के अनुरूप भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। रक्षा विश्लेषकों के अनुसार यदि आगामी विकासात्मक परीक्षण सफल रहता है, तो परियोजना अपने अगले चरण में प्रवेश करेगी और भविष्य में भारतीय नौसेना की पनडुब्बियों से इस उन्नत मिसाइल प्रणाली के परीक्षण और तैनाती का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।

by Dainikshamtak on | 2026-07-26 23:36:16

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