भारत ने स्वदेशी 19-सीटर सारस एमके-2 हल्के परिवहन विमान के डिजाइन को अंतिम रूप देकर घरेलू विमानन क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद की राष्ट्रीय एयरोस्पेस प्रयोगशाला द्वारा विकसित इस विमान का उद्देश्य क्षेत्रीय हवाई संपर्क को मजबूत करना, आयातित विमानों पर निर्भरता कम करना तथा देश में स्वदेशी विमान निर्माण क्षमता को नई दिशा देना है। डिजाइन को अंतिम रूप दिए जाने के बाद अब परियोजना का अगला चरण प्रोटोटाइप निर्माण, परीक्षण और उत्पादन साझेदारों के चयन पर केंद्रित होगा। सारस एमके-2 को विशेष रूप से कम दूरी के क्षेत्रीय मार्गों के लिए विकसित किया जा रहा है और इसमें आधुनिक डिजिटल एवियोनिक्स, ग्लास कॉकपिट, दबावयुक्त केबिन तथा उन्नत उड़ान नियंत्रण प्रणाली जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। यह विमान दुर्गम और छोटे हवाई अड्डों से भी संचालन करने में सक्षम होगा, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों तक हवाई सेवाओं का विस्तार संभव हो सकेगा। सरकार का मानना है कि यह परियोजना आत्मनिर्भर भारत अभियान को गति देने के साथ-साथ देश के नागरिक विमानन उद्योग को भी नई पहचान देगी। विशेषज्ञों के अनुसार स्वदेशी विमान निर्माण क्षमता विकसित होने से भारत भविष्य में क्षेत्रीय विमानों के निर्माण और निर्यात के क्षेत्र में भी अपनी उपस्थिति मजबूत कर सकता है। परियोजना के तहत आने वाले महीनों में प्रोटोटाइप तैयार किए जाएंगे, जिन पर व्यापक जमीनी और उड़ान परीक्षण किए जाएंगे। सभी नियामकीय प्रमाणन प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद विमान के व्यावसायिक उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ा जाएगा। इस परियोजना को भारत की स्वदेशी एयरोस्पेस तकनीक, अनुसंधान क्षमता और विमान निर्माण उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। इसके सफल क्रियान्वयन से क्षेत्रीय हवाई संपर्क योजना को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है तथा देश में विकसित तकनीक पर आधारित नागरिक विमानों के निर्माण को नई गति प्राप्त होगी।
by Dainikshamtak on | 2026-07-09 11:24:12