प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान जकार्ता में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने भारत और इंडोनेशिया के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों पर विस्तार से बात की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि भारत की अपनी राजकीय यात्रा से पहले उन्होंने जीनोम सीक्वेंसिंग परीक्षण कराया था, जिसमें उन्हें भारतीय मूल का आनुवंशिक संबंध होने की जानकारी मिली। उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि संभवतः यही कारण है कि जब भी वे भारतीय संगीत सुनते हैं तो उनका शरीर स्वतः थिरकने लगता है। राष्ट्रपति सुबियांतो ने यह भी कहा कि इंडोनेशिया की सभ्यता और संस्कृति पर भारतीय सभ्यता का गहरा प्रभाव रहा है। उनके अनुसार इंडोनेशियाई भाषा का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा संस्कृत से प्रभावित है तथा देश में प्रचलित अनेक नाम भी संस्कृत मूल के हैं। उन्होंने कहा कि भारत और इंडोनेशिया के बीच यह साझा सांस्कृतिक विरासत दोनों देशों के संबंधों की मजबूत नींव है। अपने संबोधन के दौरान राष्ट्रपति सुबियांतो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी खुलकर प्रशंसा की और कहा कि वे उनके बड़े प्रशंसक हैं तथा उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की कई नीतियों का अध्ययन किया है। उन्होंने यह भी कहा कि इंडोनेशिया को भारत के लोकतांत्रिक अनुभव, विकास मॉडल और संस्थागत व्यवस्थाओं से सीखना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने भी राष्ट्रपति सुबियांतो की टिप्पणियों का स्वागत करते हुए उन्हें भारत का सच्चा मित्र बताया और कहा कि दोनों देशों के संबंध केवल कूटनीतिक नहीं बल्कि हजारों वर्षों पुराने सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों पर आधारित हैं। हाल के वर्षों में भारत और इंडोनेशिया के बीच रक्षा, व्यापार, प्रौद्योगिकी, समुद्री सुरक्षा और सांस्कृतिक सहयोग लगातार मजबूत हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रपति सुबियांतो का यह बयान दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों को नई ऊर्जा देने वाला माना जा रहा है तथा इससे भारत-इंडोनेशिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूती मिलने की संभावना है।
by Dainikshamtak on | 2026-07-09 11:32:41