इंडोनेशिया की आधिकारिक यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योग्याकार्ता स्थित यूनेस्को विश्व धरोहर प्रंबानन मंदिर परिसर का दौरा किया और कहा कि सांस्कृतिक विरासत देशों और समाजों को भौगोलिक सीमाओं से परे जोड़ने का कार्य करती है। प्रधानमंत्री ने इंडोनेशिया की जनता का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने लगभग 1200 वर्ष पुरानी इस ऐतिहासिक धरोहर को श्रद्धा और समर्पण के साथ संरक्षित रखा है। इस अवसर पर इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो भी उनके साथ मौजूद रहे। दोनों नेताओं ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और इंडोनेशियाई विरासत एजेंसी के सहयोग से शुरू होने वाली प्रंबानन मंदिर संरक्षण एवं पुनर्स्थापन परियोजना का शुभारंभ किया। यह परियोजना दोनों देशों के बीच साझा सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत और इंडोनेशिया के बीच संबंध केवल कूटनीतिक या आर्थिक नहीं हैं, बल्कि हजारों वर्षों पुरानी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि प्रंबानन मंदिर परिसर इस साझा विरासत का जीवंत प्रतीक है और इसका संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के लिए अत्यंत आवश्यक है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण इस परियोजना के तहत मंदिर परिसर के संरक्षण, संरचनात्मक मजबूती और ऐतिहासिक स्वरूप को सुरक्षित रखने के लिए तकनीकी सहयोग प्रदान करेगा। भारत इससे पहले भी दक्षिण-पूर्व एशिया के कई ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण में योगदान दे चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से भारत और इंडोनेशिया के बीच सांस्कृतिक कूटनीति, पर्यटन, विरासत संरक्षण और लोगों के बीच संपर्क को नई गति मिलेगी। यह यात्रा दोनों देशों की साझा सभ्यतागत पहचान को वैश्विक स्तर पर और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखी जा रही है।
by Dainikshamtak on | 2026-07-09 11:29:14