यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने संकेत दिया है कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच लंबे समय से प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते पर इस वर्ष के अंत तक औपचारिक हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों पक्ष व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी, आपूर्ति श्रृंखला, हरित ऊर्जा और रणनीतिक सहयोग से जुड़े मुद्दों पर व्यापक बातचीत कर रहे हैं। भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते को वैश्विक अर्थव्यवस्था के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक समझौतों में से एक माना जा रहा है, क्योंकि दोनों मिलकर दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं और विशाल उपभोक्ता बाजारों का प्रतिनिधित्व करते हैं। पिछले कुछ वर्षों में दोनों पक्षों ने व्यापार वार्ताओं को गति देने के लिए कई दौर की बातचीत की है। प्रस्तावित समझौते का उद्देश्य वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार को बढ़ावा देना, निवेश प्रवाह को आसान बनाना, गैर-शुल्क बाधाओं को कम करना और आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता तय समय पर संपन्न होता है तो भारतीय निर्यातकों के लिए यूरोपीय बाजारों तक पहुंच और अधिक सुगम हो सकती है। वहीं यूरोपीय कंपनियों को भी भारत जैसे तेजी से बढ़ते बाजार में निवेश और व्यापार के नए अवसर मिल सकते हैं। भारत और यूरोपीय संघ के बीच पहले से ही मजबूत आर्थिक संबंध मौजूद हैं और यूरोपीय संघ भारत के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में शामिल है। हाल के वर्षों में दोनों पक्षों ने डिजिटल प्रौद्योगिकी, स्वच्छ ऊर्जा, रक्षा सहयोग, सेमीकंडक्टर, जलवायु परिवर्तन और आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाया है। आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार वैश्विक व्यापार व्यवस्था में बढ़ती अनिश्चितताओं के बीच यह समझौता दोनों पक्षों के लिए रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। उर्सुला वॉन डेर लेयेन का यह बयान इस बात का संकेत माना जा रहा है कि वार्ताएं सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही हैं। यदि समझौते पर वर्ष के अंत तक हस्ताक्षर होते हैं, तो यह भारत और यूरोपीय संघ के संबंधों में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हो सकता है और द्विपक्षीय व्यापार तथा निवेश को नई गति प्रदान कर सकता है।
by Dainikshamtak on | 2026-06-18 15:14:23