केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पूर्वोत्तर क्षेत्र के रेलवे विकास को गति देने के उद्देश्य से 11,486 करोड़ रुपये का बजटीय आवंटन किया है। यह राशि क्षेत्र में रेल संपर्क, आधारभूत ढांचे के विस्तार और नई परियोजनाओं के विकास के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पूर्वोत्तर भारत लंबे समय से परिवहन और संपर्क सुविधाओं को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल रहा है। हाल के वर्षों में रेलवे मंत्रालय ने क्षेत्र के विभिन्न राज्यों को राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से बेहतर तरीके से जोड़ने, नई रेल लाइनों के निर्माण, दोहरीकरण, विद्युतीकरण तथा स्टेशन आधुनिकीकरण पर विशेष ध्यान दिया है। अधिकारियों के अनुसार इस बजटीय आवंटन का उपयोग चल रही परियोजनाओं को तेज गति से पूरा करने और नई योजनाओं को आगे बढ़ाने में किया जाएगा। पूर्वोत्तर क्षेत्र भौगोलिक दृष्टि से चुनौतीपूर्ण माना जाता है, जिसके कारण यहां रेल अवसंरचना का विकास तकनीकी और वित्तीय दोनों दृष्टियों से जटिल रहा है। इसके बावजूद पिछले एक दशक में कई महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं पर तेजी से काम हुआ है। रेलवे संपर्क में सुधार से न केवल यात्रियों को सुविधा मिलेगी बल्कि व्यापार, पर्यटन, कृषि और औद्योगिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर रेल नेटवर्क क्षेत्रीय आर्थिक विकास और राष्ट्रीय एकीकरण को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पूर्वोत्तर के कई राज्यों में नई रेल लाइनों और पुलों के निर्माण से दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुंच आसान हुई है। इसके अलावा सीमावर्ती क्षेत्रों में बेहतर संपर्क को रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। रेलवे मंत्रालय का लक्ष्य पूर्वोत्तर क्षेत्र को देश के अन्य हिस्सों के साथ अधिक कुशल और तेज परिवहन नेटवर्क से जोड़ना है। 2026-27 के लिए किया गया 11,486 करोड़ रुपये का आवंटन इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। विश्लेषकों के अनुसार यह निवेश क्षेत्र में रोजगार सृजन, निवेश आकर्षण और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में सहायक हो सकता है। सरकार का मानना है कि मजबूत परिवहन अवसंरचना पूर्वोत्तर भारत के समग्र विकास और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में उसकी भागीदारी को और सशक्त बनाएगी।
by Dainikshamtak on | 2026-06-18 15:12:34