भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने रोजगार, शिक्षा और कौशल विकास को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि वह दौर धीरे-धीरे बदल रहा है जिसमें सॉफ्टवेयर नौकरियों और एमबीए डिग्री को सबसे अधिक महत्व दिया जाता था। उन्होंने कहा कि भारत को अब वेल्डिंग, प्लंबिंग, इलेक्ट्रिकल कार्य, बढ़ईगिरी और अन्य व्यावसायिक कौशलों को अधिक महत्व देने की आवश्यकता है। उनके अनुसार देश की आर्थिक प्रगति और औद्योगिक विकास के लिए केवल श्वेतपोश नौकरियों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विनिर्माण, निर्माण, अवसंरचना और सेवा क्षेत्रों की वास्तविक जरूरतों को देखते हुए कौशल आधारित कार्यबल तैयार करना समय की मांग है। मुख्य आर्थिक सलाहकार का कहना है कि विकसित अर्थव्यवस्थाओं में तकनीकी और व्यावसायिक कौशल रखने वाले पेशेवरों की मांग लगातार बढ़ रही है और भारत के लिए भी यह एक बड़ा अवसर हो सकता है। उन्होंने संकेत दिया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और स्वचालन के विस्तार के साथ रोजगार बाजार में महत्वपूर्ण बदलाव आ रहे हैं, जिसके कारण पारंपरिक पेशेवर क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है। दूसरी ओर कुशल तकनीकी कार्यों की मांग कई क्षेत्रों में मजबूत बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की युवा आबादी को रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध कराने के लिए कौशल विकास कार्यक्रमों और औद्योगिक प्रशिक्षण को मजबूत करना आवश्यक है। सरकार पहले से ही विभिन्न कौशल विकास योजनाओं के माध्यम से युवाओं को रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण प्रदान करने का प्रयास कर रही है। आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार यदि भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ना है तो उसे बड़ी संख्या में प्रशिक्षित तकनीकी कार्यबल की आवश्यकता होगी। ऐसे में व्यावसायिक शिक्षा और ट्रेड आधारित प्रशिक्षण की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। नागेश्वरन की टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब देश में रोजगार, कौशल विकास और भविष्य की कार्यबल आवश्यकताओं को लेकर व्यापक चर्चा चल रही है। उनकी यह टिप्पणी इस बात की ओर संकेत करती है कि आने वाले वर्षों में आर्थिक विकास और रोजगार सृजन की रणनीति में तकनीकी और व्यावसायिक कौशलों को अधिक महत्व मिल सकता है।
by Dainikshamtak on | 2026-06-18 15:10:33